भारतीय संविधान Easy Notes - 10 (1765 - 1885 ई. (ब्रिटिश शासन की स्थापना) )

क्रमशः..

Day - 10

1833 ई. का राजपत्र (चार्टर)

  • इस राजपत्र के द्वारा प्रशासन का केन्द्रीयकरण करके बंगाल के गवर्नर-जनरल (महाराज्यपाल) को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया गया तथा कम्पनी का चीन के साथ व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिया गया। अब कम्पनी एक राजनीतिक संस्था मात्र रह गई।
  • कम्पनी को आगामी बीस वर्षों के लिए क्राउन व उसके उत्तराधिकारियों के न्यास के रुप में भारत पर प्रशासन का अधिकार दे दिया गया।
  • गवर्नर-जनरल को अपनी कौंसिल सहित सारे अंग्रेजी इलाकों के लिए कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हो गया।
  • भारतीय कानूनों को संहिताबध्द करने के लिए एक ‘विधि आयोग’ का गठन किया गया तथा ‘दास प्रथा’ को खत्म करने के लिए भी व्यवस्था की गई।
  • इसमें जाति, वर्ण एवं व्यवसाय के आधार पर सरकारी सेवाओं में चयन के लिए भेदभाव अपनाने पर कुछ प्रतिबन्ध लगाया गया।
  • इसके द्वारा गवर्नर-जनरल को विधि-निर्माण की शाक्तियाँ प्रदान की गईं तथा इन विधियों के अनुमोदन की शाक्तियाँ ब्रिटिश संसद में निहित हो गई।
  • सन् 1833 ई. के चार्टर के पूर्व निर्मित विधियों को रेगुलेशन (विनियम) कहा जाता था परन्तु 1833 ई. के अधीन विधियाँ ‘अधिनियम’ कहलाती थीं।
  • इस राजपत्र से गवर्नर-जनरल की परिषद् द्वारा निर्मित विधियों को ब्रिटिश संसद अस्वीकृत कर सकती थी और भारत के लिए स्वयं विधि बना सकती थी।

जारी..

मिलते है हम अगले दिन, 1853 ई. का राजपत्र (चार्टर) के विषय पर चर्चा करने के लिये..

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