2018 में आर्थिक विज्ञान का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से विलियम डी. नोई हाऊस और पॉल एच. होमर को मैक्रोइकॉनामी में जलवायु परिवर्तन एवं तकनीकी नवोन्मेष में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है। दोनों ही विद्वानों ने दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए अद्भुत तरीके रचे हैं। इन दोनों में से होमर ने ‘अंतर्जात विकास सिद्धाँत‘ पर काम करते हुए यह बताया है कि किस प्रकार ज्ञान और विचार आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं।
विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके होमर ने अपने विचारों को मूर्त रूप देने के इरादे से ‘चार्टर सिटी‘ जैसे नए शहरों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि इन शहरों के निर्माण से नवोन्मेष और आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
- चार्टर सिटी की संरचना, एक प्रकार की स्टार्टअप इकाई होगी, जो वर्तमान में चल रहे देश के नियमों से अलग सुधारवादी नियमों पर काम करेगी।
- किसी भी देश में एक साथ नियमों में परिवर्तन करके विकास कर पाना व्यावहारिक नहीं है। अतः इसके लिए होमर ने एक अलग शहर, ‘चार्टर सिटी‘ बनाने का प्रस्ताव रखा है। नए सिरे से निर्मित इस शहर में नए नियम और संस्थाए होंगी। ये दोनों ही निवेशकों और निवासियों को आकर्षित करेंगे।
- इसके लिए मेज़बान देश को अपने किसी क्षेत्र को नए शहर के निर्माण के लिए काम में लाना होगा। नए शहर के लिए एक नया कानून या चार्टर बनाना होगा। मेज़बान देश, चाहे तो अपने प्रशासन के कुछ उत्तरदायित्व किसी विकसित देश को सौंप सकता है।
सिद्धाँत की आलोचना –
“चार्टर सिटी“ का सबसे अधिक लाभ भारत जैसे विकासशील देशों को मिल सकता है, जहाँ तेजी से शहरीकरण किए जाने की आवश्यकता है। परंतु होमर के इस सिद्धाँत की कड़ी आलोचना की गई है।