भारतीय अंतरिक्ष अभिकरण इसरो ने चंद्रमा के सतह के अन्वेषण तथा वहां प्राप्त खनिजों की जानकारी के लिए 1998 में सोम यान नाम से चंद्रमा पर यान भेजने की योजना बनाई थी । 2003 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने इसका नाम चंद्रयान रखा 386 करोड रूपये के इस परियोजना में भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को प्रातः 6:22 पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी c-11 के द्वारा चंद्रयान का प्रक्षेपण किया । 2 जनवरी 1959 को पूर्व सोवियत संघ (USSR) के लूना-1 के रूप में प्रथम चंद्र अभियान भेजा गया। भारत के द्वारा भेजा गया चंद्रयान-1, चंद्रमा पर 68वां अभियान है। भारत के पहले कुल 5 देश- रूस ( लूना 1959),अमेरिका (रेंजर 1962), जापान (हितेन1990), यूरोपीय अंतरिक्ष अभिकरण (स्मार्ट-1,2003), चीन (चेंगे-1 2007) चांद पर अपने यान भेज चुके हैं । अभी तक मात्र अमेरिका ही मानव युक्त यान चंद्रमा पर भेजने में सफल हो सका है। 20जुलाई 1969 को अपोलो के माध्यम से नील आर्मस्ट्रांग के रूप में प्रथम अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के धरती पर उतरा। 523 किलोग्राम के भारत के चंद्रयान -1 को पहले पीएसएलवी के द्वारा 36000 किलो मीटर ऊपर स्थापित किया गया ,जहां से वह अपने बूस्टर राकेट की सहायता से चंद्रमा के ऊपर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा था । दुर्भाग्यवश 27 अगस्त 2009 को संचार संपर्क टूट जाने के कारण यह है असमय काल का शिकार बन गया, पर वैज्ञानिकों के अनुसार ही यह अपने कार्य में95%सफल रहा। सबसे बड़ी उपलब्धि चंद्रमा पर पानी की खोज रही।
इसमें लगे मून इंपैक्ट प्रोब तथा मिंटोलॉजी में पर मेट्रोलॉजी मैपर ने जल की खोज की। इसरो के इस महत्वाकांक्षी योजना में नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी तथा बुल्गारिया ने अपने उपकरणों को नीति भार के रूप में भेजा।