क्रमशः..
Day - 11
1853 ई. का राजपत्र (चार्टर)
- इस राजपत्र ने सर्वप्रथम ‘भारत के लिए एक विधानमण्डल’ ( All Indian Legislative Council) की स्थापना की तथा बंगाल के लिए एक नया पद ‘लेफ्टिनेंट गवर्नर’ का सृजित किया गया।
- विधान परिषद् में 12 सदस्य होते थे। कमाण्डर-इन-चीफ, गवर्नर जनरल, गवर्नर जनरल की परिषद् के 4 सदस्य और 6 सभासद (Councillors) विधान परिषद् के सदस्य होते थे। अन्य 6 सदस्यों में बंगाल के मुख्य न्यायाधीश, कलकत्ता सुप्रीम कोर्ट का एक न्यायाधीश और बंगाल, मद्रास, बम्बई और आगरा प्रान्तों के प्रतिअनिधि शामिल थे। इस प्रकार, सर्वप्रथम भारतीय विधान परिषद् में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का सिध्दान्त प्रारम्भ किया गया।
- विधान परिषद् का मुख्य कार्य देश के लिए विधि बनाना था।
- इस राजपत्र का महत्वपूर्ण योगदान विधायी एवं कार्यपालिकीय शक्तियों का पृथक्करण रहा।
- सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां अब डायरेक्टरों के द्वारा न होकर प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से शुरु की गई और इसकी देखरेख के लिए लार्ड मैकाले की अध्यक्षता में एक आयोग की स्थापना की गयी।
विधि आयोग की स्थापना
- भारत के विधिक एवं संवैधानिक इतिहास में विधि आयोग की स्थापना का अपना अलग ही महत्व है।
- सन् 1833 ई. के राजपत्र से विधि आयोग के गठन का इतिहास प्रारम्भ होता है।
- विधि आयोग का गठन मुख्य रुप से निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया गया –
- न्यायालयों र्वं न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देना।
- पुलिस विभाग की वास्तविक स्थिति की जाँच कर उसमें सुधार के उपाय सुझाना।
- विभिन्न विधियों, प्रथाओं एवं रीति-रिवाजों का अध्ययन कर उसकी कमियों को दूर करने के लिए उपाय सुझाना।
- नियमों, परिनियमों, अधिनियमों आदि में परिवर्तन, परिवर्ध्दन, संशोधन आदि के सुझाव देना।
- विधि आयोग समय-समय पर अपने प्रतिवेदन देता रहा। विधि आयोग के गठन का सिलसिला भी निरन्तर चलता रहा। भारत में आज भी विधि आयोग विधि-निर्माण के क्षेत्र में अपनी अमूल्य सेवाएं दे रहा है।
नोट - 1857 ई. के विद्रोह के शान्त होने के बाद भारत का शासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हाथों से निकलकर ब्रिटिश क्राउन के हाथ में पहुँच गया। उस समय कम्पनी के अध्यक्ष थे – ‘रोस मेगल्स’ व ‘जॉन स्टुअर्ट मिल’।
1857 ई. के विद्रोह ने भारतीय शासन को सम्राट को हस्तान्तरित करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया और ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त कर दिया। अर्थात् अब भारत की सत्ता प्रत्यक्ष रुप से ब्रिटिश सरकार के पास चली गयी।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, 1858 - 1919 ई. (ब्रिटिश क्राउन का शासन) विषय पर चर्चा करने के लिये..