● तालीकोटा का युद्ध 23 जनवरी 1565 ईस्वी दक्कन के सल्तनतों और विजयनगर साम्राज्य के बीच लड़ा गया था विजयनगर साम्राज्य की यह लड़ाई राक्षस तगड़ी नामक गांव के नजदीक लड़ी गई थी इस युद्ध में विजय नगर साम्राज्य को हार का सामना करना पड़ा परिणाम विजय नगर की हार और दक्षिण भारत के अंतिम हिंदू साम्राज्य का पतन रहा।
तालीकोटा की लड़ाई के समय सदाशिव राय विजयनगर साम्राज्य का शासक था लेकिन वह एक कठपुतली शासक था वास्तविक शक्ति उसके मंत्री राम राय द्वारा प्रयोग किया जाता था सदाशिव राय ने ढक्कन की इन सल्तनत के बीच अंतर पैदा करके उन्हें पूरी तरह से कुचलने की कोशिश की थी हालांकि बाद में इन सल्तनतों को विजय नगर के इस मंसूबे के बारे में पता चल गया था और उन्होंने एकजुट होकर एक गठबंधन का निर्माण किया था और विजय नगर साम्राज्य पर हमला बोल दिया था दक्कन की संताने विजयनगर की राजधानी में प्रवेश करके उनको बुरी तरह से लूटा और सब कुछ नष्ट कर दिया।
इसके परिणाम:-
★ तालीकोटा की लड़ाई के पश्चात तालीकोटा की लड़ाई के पश्चात दक्षिण भारतीय राजनीति मैं विजयनगर राज्य की प्रमुखता समाप्त हो गई।
★ मैसूर के राज्य, वेल्लोर के नायकों और शिमोगा में केलादी के नायकों ने विजयनगर से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
★ यद्यपि दक्कन की इन सल्तनत ओं ने विजयनगर की इस पराजय का लाभ नहीं उठाया और पुनः पहले की तरह एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त हो गए और अंततः मुगलों के आक्रमण के शिकार हुए।
विजयनगर की हार के कारण:-
★ दक्कन की सल्तनत ओं की तुलना में विजयनगर के सेना में घुड़सवार सेना की कम संख्या थी अतः विजयनगर की सेना को पराजय का सामना करना पड़ा।
★ दक्कन की सल्तनत तुम की तुलना में विजयनगर के सेना में जो भी हथियार इस्तेमाल किए जा रहे थे वह अधिक परिष्कृत नहीं थे।
★ दक्कन की सल्तनतों के तोपखाने युद्ध में बेहतर थे।
★ विजयनगर की हार का सबसे बड़ा कारण गिलानी भाइयों का विश्वासघात था जिसके कारण विजयनगर की सेना को पराजय का सामना करना पड़ा।