भारत में बेरोजगारी की चुनौती से निपटने के लिए कुछ तथ्यों का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी है। (1) भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष 50-70 लाख रोजगार उत्पन्न करने की आवश्यकता है। (2) 90 प्रतिशत से अधिक कामकाजी लोग अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसमें न तो रोजगार सुरक्षित है, और न ही सामाजिक सुरक्षा है। (3) संगठित क्षेत्र में लगातार बढ़ती अनौपचारिकता। अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। जितने भी ट्रेड यूनियन हैं, वे सब औपचारिक क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिये आगे आते हैं।
वर्तमान सरकार ने अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वालों के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए दो कदम उठाए हैं।
(1) अनौपचारिक रूप से काम कर रहे रोजगार को औपचारिक क्षेत्र में लाने हेतु प्रोत्साहन देना।
(2) अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने को मजबूर लोगों को सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान देना।
- इन दोनों बिन्दुओं को सफल बनाने का सबसे पहला प्रयास ‘नियत अवधि अनुबंध’ की शुरूआत करने से किया गया है। इसके अंतर्गत किसी भी श्रमिक या कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी की तरह की स्थितियां प्रदान करनी होंगी। इनको वे सारे कानूनी अधिकार भी दिए जाएंगे, जो एक स्थायी कर्मचारी को दिए जाते हैं। इससे व्यवसायियों को भी समय की मांग के अनुरूप कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में सहायता मिलेगी। श्रमिकों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
- औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों की अनुपालन दर में भी कटौती की गई है। ईज ऑफ कंप्लायंस या अनुपालन को सहज बनाने के लिए सरकार ने नौ केन्द्रीय कानूनों के अंतर्गत बनाए जाने वाले कंपनी रजिस्टरों की संख्या को 56 से घटाकर 5 कर दिया है।
- सरकार ने श्रम सुविधा पोर्टल, यूनिवर्सल अकांऊट नंबर और नेशनल कॅरियर सर्विस पोर्टल की शुरूआत की है। यह तकनीक आधारित ऐसी रूपांतरकारी पहल है, जिनसे रोजगार के क्षेत्र में जटिलता कम होगी, ओर जवाबदेही बढ़ेगी। स्टार्ट अप के लिए श्रम कानून अनुपालन दर को कम करने हेतु राज्य व केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों को छः श्रम कानूनों के अंतर्गत सेल्फ -सर्टिफिकेशन के लिए तैयार किया गया है। साथ ही नियमित निरीक्षण करने को भी कहा गया है।
- कर्मचारी भविष्य निधि कवरेज में विस्तार किया जाना भी सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है। 2017 में इसके दायरे में आने से छूट गए कर्मचारियों के लिए सरकार ने कर्मचारी नामांकन अभियान चलाया था। इसके अंतर्गत् लगभग एक करोड़ कर्मचारियों का नामांकन हुआ।