नए भारत के लिए श्रम - सुधार (part 2 )

2016 में प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना भी चलाई गई। इस योजना में नए रोजगार देने पर सरकार तीन वर्ष तक भविष्य निधि अपनी ओर से देगी।

  • कृषि में सबसे ज्यादा लोगों के आश्रित होने के बाद दूसरा नंबर निर्माण उद्योग का आता है। यह क्षेत्र सबसे ज्यादा श्रमिकों को अस्थायी रोजगार देता आया है। भवन एवं अन्य निर्माण कार्य कर्मचारी अधिनियम के अंतर्गत इन श्रमिकों का पंजीकरण किया गया है। इनकी संख्या 3 करोड़ के आसपास है। इन श्रमिकों के पलायन करने पर यूनिवर्सल एक्सप्रेस नंबर इनकी पोर्टेबिलिटी को बनाए रखता है।

2017 में सरकार ने भवन एवं अन्य निर्माण कार्य श्रमिक कानून 1998 में भी संशोधन किया है। इसके द्वारा पंजीकृत प्रतिष्ठानों को यूनीफाइड एनुअल रिटर्न फाइल करने में पारदर्शिता दी जा सकेगी ।

  • 2017 में मजदूरी के भुगतान अधिनियम में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि सरकार चाहे, तो उद्योगों या अन्य प्रतिष्ठानों को केवल बैंक खातों के माध्यम से मजदूरी के भुगतान का निर्देश दे सकती है।।
  • समाजिक सुरक्षा के लिए भी सरकार प्रयत्न कर रही है। इससे संबंधित श्रम कोड बनाए जाने का कार्य अपने चरम पर है। इस कोड का आधार संविधान है।

श्रम कानूनों की नींव अच्छी भावना के साथ रखी गई थी। परन्तु इनकी डिजाइनिंग गलत होने के कारण श्रमिक वर्ग के छोटे से भाग को ही इसका लाभ मिल पा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से प्रकाशित मासिक डाटा में सरकार द्वारा श्रम सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का स्पष्ट प्रतिबिंब देखने को मिल सकता है। भारत को अगर विश्व में अपनी आर्थिक पकड़ बनानी है, और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान और ऊँचा उठाना है, तो श्रम सुधारों की ओर अनिवार्य रूप से ध्यान देना होगा।।

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