भारतीय संविधान Easy Notes - 13 (1858 - 1919 ई. (ब्रिटिश क्राउन का शासन) )

क्रमशः..

Day - 13

भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861

  • इस अधिनियम ने कानून बनाने के कार्य में भारतीयों का सहयोग लेने का उपबंध बनाया तथा प्रान्तीय विधान परिषद् को भी कानून बनाने का अधिकार दिया गया।
  • अधिनियम ने वायसराय को प्रान्तों की विधान परिषद् में भारतीयों को नामजद करने का अधिकार भी दिया गया। इसके पूर्व केवल शासन के ही प्रतिनिधि इसमें होते थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा ‘भारत के राज्य सचिव’ के अधिकार को अत्यन्त सीमित कर दिया। वह भारत के लिए किसी ब्रिटिश सदस्य को केवल सेनापति नियुक्त कर सकता था।
  • इस अधिनियम के द्वारा वायसराय को असीमित अध्हिकार मिल गये थे।
  • यह पहला ऐसा अधिनियम था जिसने ‘विभागीय प्रणाली’ एवं ‘मंत्रिमण्डलीय प्रणाली’ की नींव रखी।
  • प्रान्तो की विधान परिषदों में जो भारतीय नामित किये गये थे, वे देशी राजे-रजवाड़े अथवा जमींदार होते थे। उन्हेविधि का कोई ज्ञान नहीं होता था और न ही वे भारत के लिए बनायी जाने वाली विधियों में कोई दिलचस्पी ही लेते थे। अतः आम भारतीयों को इस अध्हिनियम से कोई लाभ नही हो सका।

इस समय देश का राजनीतिक वातावरण काफी विस्फोटक बन चुका था। 1857 की राज्यक्रांति ने राष्ट्रियता का जो बीज बोया था वह जोरों से पनप रहा था। शिक्षा के प्रचार के साथ – साथ राष्ट्रीयता की भावना भी बढ़ चुकी थी। भारतीय समाचारपत्रों औ देशी भाषाओं के विकास ने इसमें प्रर्याप्त योगदान दिया। अंग्रेजो की दमन – नीति ने आग में घी का काम किया। सब ओर से एक ही माँग की जाने लगी कि भारतीयों को प्रशासन तथा विधि-निर्माण के कार्य में अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाय। भारतवासियों को अंग्रेजों से असन्तोष और घृणा हो गयी।

इसी वातावरण में सन् 1885 में सर ए. ओ. ह्यूम द्वारा ‘अखिल भारतीय कांग्रेस’ की स्थापना हुई। कांग्रेस ने अपने पहले अधिवेशन में एक प्रस्ताव पास करके वर्तमान सरकारी ढाँचे के विरुध्द असन्तोष जाहिर किया और उसमें परिवर्तन करके भारतीयों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की माँग की। उस समय भारत के वायसराय लार्ड डफरिन थे।

जारी..

मिलते है हम अगले दिन, भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 विषय पर चर्चा करने के लिये..

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