विश्व की प्रथम चार सभ्यताएं- लगभग 5000 साल पहले मानव सभ्यता चार अलग-अलग स्थानों पर गहन कृषि क्षेत्र से शहरों के विकास की तरफ उन्मुख हुई। पहले कस्बे बने फिर शहरों का विकास हुआ। तदुपरांत इन क्षेत्रों में शहरी सभ्यता का विकास दृष्टिगोचर होता है, यह सभी के सभी अलग - अलग नदियों की घाटियों में स्थित थी- टिगरिस और यूफ्रेट्स के तट पर मेसोपोटामिया, नील के तट पर मिस्र सभ्यता, सिंधु के तट पर सिंधु सभ्यता तथा हवांग - हो (पीली नदी) के तट पर चीनी सभ्यता।
करीब - करीब 3500 वर्ष पूर्व मेसोपोटामिया में पहले शहर का विकास हुआ तदुपरांत मिस्र और भारत में और अंत में चीन में ऐसी प्रवृत्ति देखने को मिलती है। यह सभी की सभी ऐतिहासिक सभ्यताएं बड़ी नदी घाटियों में स्थित थी जो कि कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त थी और उत्पादित अधिशेष से शहरी जनसंख्या का निर्वाह संभव था।
वैसे तो यह सारी सभ्यताएं स्वतंत्र रूप से विकसित हुई तथापि इनमें काफी समानताएं थी। और यह अपनी पूर्ववर्ती कृषि आधारित समाज से काफी भिन्न थी। विस्तृत शहरों का विकास इनकी एक बड़ी महत्वपूर्ण समानता थी। यह सभी अपनी किसी भी पूर्ववर्ती तथा परवर्ती काल में विकसित किसी भी सभ्यता से भव्य थी, अत: चौथी शताब्दी ई. पू. की यह शहरी क्रांति मानव विकास कार्य पूर्ण मानी जाती है।
'इंडिया' शब्द की उत्पत्ति 'इंडस' (सिंधु) नदी के नाम पर आधारित है अर्थात 'इंडस' (सिंधु) का क्षेत्र, प्रारंभिक साहित्यिक (लिखित) प्रमाण के अनुसार इस क्षेत्र में आकर बसने वाले शुरुआती आर्यों ने इन्डस को सिंधु (पानी की बड़ी झील) कहा। ईरान होते हुए भारत की तरफ अपनी लंबी यात्रा में आयोँ ने कभी भी इतनी विशाल नदी नहीं देखी थी, 2825 ईस्वी में स्वार्थी सम्राट डेरियस-1 ने सिंधु क्षेत्र को जीतकर अपने साम्राज्य का एक प्रांत बना दिया था। सही उच्चारण ना कर पाने की वजह से फारसवासियों ने सिंधु को हिंदू कर दिया था जिसे बाद में यूनानियों ने इंडस उच्चरित किया। ग्रीको और रोमवासियों के लिए सिंधु क्षेत्र इन्डस का पर्यायवाची बन गया। सिंध पर अरब की विजय के पश्चात पुराने सिंधु से हिंदुस्तान शब्द की उत्पत्ति हुई तथा वहां के वासी हिंदू नाम से जाने जाने लगे तथा उनका धर्म हिंदूइज्म या हिंदुत्व कहलाया।
अत: इंडिया नाम भारत की सर्वप्रथम सभ्यता- सिंधु सभ्यता के समय से प्रचलित है हालांकि बीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक तक इसके बारे में कोई नहीं जानता था। 1920 के दशक में तो प्राचीन नगरों - हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोज हुई। शहरों की खोज के आरंभ में इसे सिंधु घाटी सभ्यता कहा। परंतु बाद में सिंधु घाटी से काफी दूर के इलाके तक ऐसी सभ्यता की खोज के बाद इसे सिंधु सभ्यता कहा जाने लगा। साथ ही साथ हड़प्पा शहर के नाम पर इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं ।
भारत की पहली और प्रारंभिक सभ्यता की खोज में एक पहेली का स्वरूप ले लिया है, ऐसा लगता है कि यह अपने पूर्ण विकसित रूप में एकाएक उत्पन्न हुई थी। जबकि इसके पहले की सभी सभ्यताएं छोटे स्तर पर शुरू हुई थी और सैकड़ों वर्ष बाद पूर्ण विकसित हो पाई थी लेकिन अभी कुछ समय पहले तक इसकी उत्पत्ति और विकास के बारे में काफी कम जानकारी है। परंतु 1973 से 1980 के बीच दो फ्रांसीसी पुरातत्व शास्त्रियों (जीन फ्रेंकोई जैंरिज और रिचर्ड एच मिडो) द्वारा बलूचिस्तान के मेहरगढ़ इलाके में की गई विस्तृत खोजों ने काफी हद तक इस पहेली को सुलझा दिया। इन पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार मेहरगढ़ में पुरानी बच्चियों के अवशेषों की श्रृंखला मिलती है । इस श्रृंखला से अनाज उत्पादन, पशुपालन, हस्तकला, वास्तु कला तथा विचार के क्षेत्र में विकास की पूरी प्रक्रिया साफ नजर आती है, तथा कोई भी प्रक्रिया के अंतर्गत सिंधु सभ्यता के विकास की प्रक्रिया को समझ सकता है।