मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण एक स्थान है। यह स्थान वर्तमान में बलोचिस्तान (पाकिस्तान) के कच्छी मैदानी क्षेत्र में है। यहाँँ पाषाण युुुग तथा नवपाषाण युग (7000 ईसा-पूर्व से 2500 ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों में गेहूँ एवमं जौ की खेती करते थे तथा भेेेड, बकरी एवं अन्य जानवर पालते थे। इससे स्थायी जीवन की शुरुआत हुुुई । यह स्थल भारतीय उपमहाद्वीप को भी गेंहूँ-जौ के मूल कृषि वाले क्षेत्र तथा प्रचीनतम् साक्ष्य में शामिल कर देता है।
मेहरगढ़ आज के बलूचिस्तान में बोलन नदी के किनारे स्थित है। यह स्थल हड़प्पा सभ्यता से पूर्व का ऐसा स्थल है जहां से हड़प्पा जैसे ईंटों के बने घर मिले हैं और लगभग 6500 वर्तमान पूर्व तक मेहरगढ़ वासी हड़प्पा जैसे औज़ार एवं बर्तन भी बनाने लगे थे। मेहरगढ़ से प्राप्त होने वाली अन्य वस्तुओं में बुनाई की टोकरियाँ, औज़ार एवं मनके हैं जो बड़ी मात्र में मिले हैं।