भारतीय संविधान Easy Notes - 15 (1858 - 1919 ई. (ब्रिटिश क्राउन का शासन) )

क्रमशः..

Day - 15

विशेष: एक और अधिनियम आया था 1892 ई. ‘भारतीय परिषद अधिनियम, 1892'। इस अधिनियम द्वारा केंद्रीय तथा प्रान्तीय विधान परिषदों की सदस्य संख्या बढ़ा दिया गया। केंद्रीय विधान परिषद में कम-से-कम 10 और अधिक-से-अधिक 16 अतिरिक्त सदस्य होते थे। मद्रास और बम्बई विधान परिषदों में 8 से लेकर 20 तक, बंगाल मे अधिकतम 20, उत्तर-पश्चिमी प्रांतो और अवध में 15 सदस्य होते थे।

भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 (मार्ले - मिन्टो सुधार)

  • सन् 1905 ई.मे ‘मिन्टो’ भारत के वायसराय एवं ‘मार्ले’  राज्य सचिव नियुक्त किये गये। इन दोनों के संयुक्त प्रयासों से किये गये विधिक एवं संवैधानिक सुधारों को ‘मार्ले - मिन्टो सुधार’के नाम से जाना जाता है।
  • यद्यपि सन् 1909 के भारतीय परिषद् अधिनियम द्वारा भारतीयों को प्रशासन तथा विधि निर्माण के क्षेत्र में प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया, लेकिन कुल मिलाकर वह भारतवासियों की आशाओं एवं आकांक्षाओ को पूरा नहीं कर सका।
  • इस अधिनियम की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि इसने भारत्मेन साम्प्रदायिकता के बीज बोये। मताधिकार में हिन्दू एवं मुसलमानों को खुश करना था। इससे ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के भी संकेत मिलते हैं।
  • इस अधिनियम में स्त्रियों की उपेक्षा की और उन्हें मताधिकार नहीं दिया गया।
  • मदन मोहन मालवीय, गोपालकृष्ण गोखले जैसे उदारवादी नेता जो पहले इस अधिनियम के प्रशंसक थे किन्तु बाद में इसके सबसे बड़े आलोचक बन गये।
  • मार्ले - मिन्टो सुधार भार्तीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने में असफल रहा, क्योंकि भारतीयों की माँग एक उत्तरदायित्वपूर्ण सरकार की स्थापना की थी जिसे यह अधिनियम पूरा नहीं कर सका।

जारी..

मिलते है हम अगले दिन, (1919 - 1946 ई. (स्वशासन का प्रारम्भ) ) विषय पर चर्चा करने के लिये..

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