आधुनिक युग को चार अवस्थाओं में बांटा जा सकता है। प्रथम अवस्था 1800 से 1885 तक, दूसरी अवस्था 1885 से 1920 तक, तीसरी अवस्था 1921 से 1945 तक, चौथी अवस्था 1946 से आज तक। इस युग में सभी तरह के काव्य तथा और वैज्ञानिक तथा तकनीकी साहित्य का समावेश है।
अंग्रेजी से मराठी में अनुवाद के लिए अनेक प्रयास किए गए। पहला मराठी शब्दकोश मराठी व्याकरण 1829 प्रकाशित हुई जबकि पहला मराठी अखबार 1835 मैं निकला। 'केसरी' अखबार के 1880- 81 में निकलने से मराठी साहित्य के विकास में सहायता मिली।
केशवसुत (1866-1905) को आधुनिक मराठी काव्य आंदोलन का प्रणेता माना जाता है 1885 में आरंभ हुआ ।1923 के आसपास मराठी कवियों का एक समूह माधव जूलियन (1894-1939) के नेतृत्व में इकट्ठा हुआ जिसे बाद में रवि किरण मंडल के नाम से पुकारा गया, जल्द ही मराठी साहित्य लोकप्रिय हो गया। माधव जूलियन का काव्य 'वृहतरंग' एक प्रशंसनीय कृति है। बी. आर. तांबे (1874-1941), चंद्र शेखर गोरे (1871-1937) मनोरमबाई रानाडे (1896-1926) आदि रवि किरण महत्वपूर्ण कवि थे।
राष्ट्रवादी कवियों में बाल गंगाधर तिलक, वी. डी. सावरकर, जी. टी. दावेकर (1874-1956) एस. एन. रानाडे (1892-1984) तथा एन.जी. देशपांडे, बी.एस मादेॅकर, पी.एस. रागे, एन. सी. केलकर (1872-1947) ए. के. कोल्हातकर, सी. वी. जोशी, विंदा करंदीकर, वसंत बापट तथा शांता शेल्के आदि मराठी साहित्य की अंतिम अवस्था के प्रमुख नाम है।
हरि नारायण आप्टे(1864-1919) की 'मधाली स्थिति' इस भाषा में प्रकाशित होने वाला पहला उपन्यास है। बाबा पद्मजी का 'यमुना पर्यटन'(1857) मराठी भाषा का पहला उपन्यास है जो समाज सुधार के ऊपर लिखा गया है। मराठी भाषा के अन्य लोकप्रिय उपन्यासकार थे - नाथ माधव, सी. वी. वैध प्रो. वी. एम जोशी, वी. एस. खांडेकर, साने गुरुजी, कुसुमावती देशपांडे और कमलाबाई तिलक। दया पवार की आत्मकथा 'बलुता' मराठी भाषा की पहली दलित आत्मकथा है।