धरमत का युद्ध (15 अप्रैल 1658 ई०)

धरमत का युद्ध 15 अप्रैल 1658 ई० को लड़ा गया था।

15 अप्रैल 1658 को जब शाहजहां बीमार था तभी से स्थान पर शाही सेना जिसका नेतृत्व धारा के साथ राजा जसवंत सिंह एवं कासिम अली कर रहे थे और औरंगजेब जिसके साथ मुराद था के मध्य हुआ था।

यह युद्ध उज्जैन से 14 मील की दूरी पर हुआ था धर्मत के युद्ध में एक ओर से बीमार मुगल सम्राट शाहजहां का पुत्र दारा शिकोह अपने पिता का पक्ष लेते हुए राजा जसवंत सिंह तथा कासिम अली की फौजौ को साथ लेकर लड़ रहा था। वहीं दूसरी ओर से विद्रोही औरंगजेब तथा मुराद की फौजियों ने भाग लिया। इस युद्ध में शाही फौज की बुरी तरह से हार हुई और उसे मुंह की खाकर पराजय का सामना करना पड़ा।

औरंगजेब ने विजई होकर दिल्ली की ओर तेजी से प्रयाण किया। वह चंबल नदी पार करके आगरा से पूर्व में 8 मील की दूरी पर सामूगढ़ पहुंचा समूगढ़ मे दारा शिकोह के नेतृत्व में औरंगजेब की शाही  फौज से पुनः मुठभेड़ हुई। इस बार भी दारा शिकोह पराजित हुआ और वह युद्ध क्षेत्र से भाग खड़ा हुआ।

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