यदि खेलों के क्षेत्र में देखें, तो हम पाते हैं कि 2014 से नई सरकार के गठन और ओलंपिक रजक पदक विजेता को खेलमंत्री बनाए जाने के बाद से भारत में खेलों के स्तर में कुछ सुधार हुआ है। परन्तु अन्य क्षेत्रों की तरह ही यहाँ भी महिलाओं या लड़कियों की तुलना में कमतर और कमजोर समझकर उन्हें अलग तरह से रखा जाता है।
कुछ प्राथमिक विद्यालयों का सर्वेक्षण करने के बाद यह पाया गया कि स्कूलों के खेल के पीरियड में भी लड़कियाँ घूमती या बातें करती रहती हैं। जबकि लड़के खेलों का पूरा आनंद लेते हैं। यही कारण है कि एड्यू स्पोर्टस् (2017-18) के आठवें स्वास्थ्य और फिटनेस सर्वेक्षण में लड़कियों की तुलना में लड़कों का बॉड़ी मास इंडेक्स ज्यादा अच्छा पाया गया। इस सर्वेक्षण में लड़कियों की शारीरिक शक्ति और आंतरिक बल लड़कों की तुलना में कम पाई गई।,
वैश्विक खेल प्रतिस्पर्धाओं में भारत के खराब प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने स्कूलों में खेल को अहमियत देने की नीति अपनाई।
- समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत देश के 11.5 लाख सरकारी स्कूलों में खेल उपकरण मुहैया कराने की मुहिम चलाई गई।
- इसी वर्ष जुलाई में सरकार ने अगले वर्ष से सीबीएसई पाठ्यक्रम में खेल को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।
- उच्चतम न्यायालय में खेलों को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने संबंधी जनहित याचिका दाखिल की गई है।