कंप्यूटर के इतिहास की रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारी पार्ट 1

मानवीय भावनाओं को मूर्त रूप देने के लिए विश्व की पहली लिपि का आविष्कार करने वाले मेसोपोटामियाईयों ने ही गणितीय गणनाओं में जोड़ एवं घटाव की क्रियाओं में तीव्रता लाने के लिए अबैक्स नामक यंत्र का निर्माण 2700-2300ई०पू० में किया। बाद में मिश्र वासियों,‌ चीनियों आदि ने स्वतंत्रता पूर्वक इसका निर्माण किया। इराक निवासी अल जजारी ने 1206 ईस्वी में जिस महल घड़ी का निर्माण किया उसे दुनिया का पहला प्रोग्रामेबल समरूप कंप्यूटर का अद्य रूप माना जाता है। स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक जॉन नेपियर ने 1617 में नेपियर बोन का आविष्कार किया। इसके माध्यम से गुणा की क्रिया तेजी से की जा सकती थी। फ्रांस की वैज्ञानिक पास्कल ने 1643 ई में  पास्कलाईन नामक यंत्र का आविष्कार किया।यह जोड की क्रिया यांत्रिक रूप से करने में सक्षम था।
19वींशताब्दी के आरंभिक दशकों मे कैंब्रिज विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने दो गणना संबंधी इंजनों पर कार्य किया। इन इंजनों को डिफरेंस इंजन तथा एनालिटिकल इंजन के नाम से जाना जाता है। 1842 ईस्वी में उन्होंने एनालिटिकल इंजन निर्माण के लिए जो रूपरेखा बनाई थी उसमें कुछ अभूतपूर्व मौलिक सिद्धांत थे। इन सिद्धांतों का बाद में उपयोग कर आधुनिक कंप्यूटरों के निर्माण किये गए। बैबेज को उनके इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए ‘कंप्यूटर का जनक’ स्वीकार किया गया था। आंकड़ों के प्रविष्टि के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक हर्मन होलिरिक्स ने 1887 ईसवी में दुनिया का पहला संग्राहक युक्ति (storage device) का निर्माण किया। इस युक्ति को पंच कार्ड के नाम से जाना जाता है। हावर्ड एकेन तथा इंटरनेशनल बिज़नेस मशीन के संयुक्त प्रयास से 1937 से 1945 के बीच मार्क1 नामक दुनिया का पहला स्वचालित कंप्यूटर का निर्माण किया गया। विद्युत चालित दुनिया का पहला कंप्यूटर एस्कर्ट और मौचली ने बनाया। 1946 में बने इस कंप्यूटर को एनिएक (ENIAC- ELECTRONIC NUMERICA INTEGRATOR AND CALCULATOR) के नाम से जाना गया। यह विश्व का प्रथम पूर्ण कंप्यूटर था।

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