कंप्यूटर के इतिहास की रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारी पार्ट 2

एनिऐक  प्रोग्राम में परिवर्तन करने के लिए तारों को दोबारा संयोजित करना पड़ता था। अतः इसकी बनावट में दृढता को दूर करने के लिए ‘वोन न्यूमैन' नामक वैज्ञानिक ने द्विआधारी पद्धति (binary सिस्टम) का प्रयोग कर एक लचीला बनावट (flexible आर्किटेक्चर) का प्रयोग किया। इस प्रोग्राम को संचित प्रोग्राम बनावट (stored program आर्किटेक्चर) नाम दिया गया। इस पद्धति का उपयोग करना edvac या (electronic discrete variable automatic computer) नामक कंप्यूटर का निर्माण किया गया। आधुनिक कंप्यूटरों में वोन न्यूमैन के स्टोर्ड प्रोग्राम डिजाइन का ही उपयोग किए जाने के कारण न्यूमैन कंप्यूटर भी कहा जाता है। आईबीएन कंपनी द्वारा निर्मित यूनीवैक (UNIVAC - UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER) को पहला अंकीय (digital) तथा व्यावसायिक (commercial) कंप्यूटर माना जता है।
व्यवसायिक कार्यो के लिए पहले कंप्यूटर का प्रयोग अमेरिका की ‘जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी’ ने 1953 ईस्वी में किया। इस कंप्यूटर का नाम UNIVAC-1 था।

आरंभिक कंप्यूटरों में निर्वात नलिकाओं(vacuum tubes) का प्रयोग किया जाता था। हजारों की संख्या में प्रयोग किए जाने वाले इन नलिकाओं की वजह से कंप्यूटर काफी भारी, बहुत जल्द गर्म हो जाने वाले तथा अत्यंत सुस्त थे। निर्वात नलिकाओं का प्रयोग करने वाले कंप्यूटरों को प्रथम पीढ़ी का कंप्यूटर कहा जाता है। Bartein and Shockley ने 1948 में ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया।1953 से कंप्यूटरों में निर्वात नली के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया जाने लगा। इसके प्रयोग से कंप्यूटर के आकार में कमी आई एवं उनकी प्रसंस्करण गति (प्रोसेसिंग स्पीड) बढ़ गई। ऐसे कंप्यूटरों को द्वितीय पीढ़ी का कंप्यूटर कहा जाता है। आईबीएम- 7000, लियो मार्क-3, एटलस , एसपीडी कुछ कंप्यूटर थे। अमेरिकी वैज्ञानिक  
जैक किल्वी ने 1958 में एक छोटे से सिलिकॉन के चिप पर कई ट्रांजिस्टर को आपस में जोड़कर इंटीग्रेटेड सर्किट का निर्माण किया। आई सी के प्रयोग से कंप्यूटर छोटे, अधिक दक्ष, एवं सस्ते हो गए। आईसीयू कंप्यूटरों को तृतीय पीढ़ी का कंप्यूटर कहते हैं। IBM 360,Pdp-8, ICL-1900 इत्यादि तीसरी पीढ़ी के कुछ महत्वपूर्ण कंप्यूटर हैं।

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