संविधान सभा के विचार का प्रतिपादन सर्वप्रथम इंग्लैंड के सामंतवादियों और सर हेनरी मेन ने किया था। परंतु इसको व्यवहारिक रूप से सर्वप्रथम अमेरिका और फ्रांस में अपनाया गया। भारत में संविधान सभा के सिद्धांत का दर्शन सर्वप्रथम तिलक के निर्देशन में तैयार 1895 की स्वराज विधेयक बिल में होता है। 1922 में गांधी जी ने कहा कि भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छा अनुसार ही होगा। 1924 में पंडित मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सम्मुख संविधान सभा के निर्माण की मांग प्रस्तुत की।किंतु औपचारिक रूप से संविधान सभा के विचार का प्रतिपादन सर्वप्रथम एमएन रॉय ने किया, जिसे लोकप्रिय बनाने एवं मूर्त रूप देने का कार्य 1939 ईस्वी में जवाहरलाल नेहरू ने किया। समय-समय पर कांग्रेस ने भी इस मांग को उठाया। सर्वप्रथम 1942 में क्रिप्स मिशन ने भारत में संविधान सभा के गठन की बात को स्पष्ट से स्वीकार किया परंतु, 1946 में कैबिनेट मिशन प्रस्ताव द्वारा इसे व्यवहारिक रूप प्रदान किया जा सका। भारतीय संविधान सभा के बारे में ब्रिटिश विधिशास्त्री जी आष्टिन ने अपनी पुस्तक द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन में कहा है कि ‘‘संविधान सभा कांग्रेसी और कांग्रेस भारत था।"
जुलाई 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा के लिए चुनाव हुआ। संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधानसभा के सदस्यों द्वारा किया गया।
*(संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई जिसके अस्थाई अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा थे किंतु मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया था।11 दिसंबर 1946 को डॉ राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष चुना गया)*