माउंटबेटन योजना के अनुसार यह अधिनियम 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत किया गया जो 18 जुलाई 1947 को स्वीकृत हो गया इस अधिनियम द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किए गए
15 अगस्त 1947 को दो डोमिनियन राज्यों पाकिस्तान एवं भारत की स्थापना की जाएगी।
दोनों राष्ट्रों के लिए पृथक पृथक गवर्नर जनरल नियुक्त किए जाएंगे। भारत में माउंटबेटन को गवर्नर जनरल पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया जबकि पाकिस्तान में मोहम्मद अली जिन्ना को गवर्नर जनरल तथा लियाकत अली खान को प्रधानमंत्री बनाया गया।
दोनों देशों के लिए अलग अलग संविधान सभा का गठन किया जाएगा और वर्तमान संविधान सभा ही नए संविधान के बनने और लागू होने तक विधानमंडल के रूप में 1935 के एक्ट के तहत कार्य करेगी।
देसी रियासतों को भारत या पाकिस्तान किसी भी राज्य में शामिल होने की छूट होगी।ब्रिटिश क्राउन का देसी रियासतों पर सेंड प्रवचन समाप्त कर दिया गया तथा भारत मंत्री का पद भी समाप्त कर दिया गया।
दोनों ही राज्यों की सीमा का निर्धारण करने के लिए दो सीमा आयोग (पंजाब सीमा आयोग और बंगाल सीमा आयोग) गठित किया गया जिसके अध्यक्ष सर रेडक्लिफ थे। इन आयोगों का कार्य पंजाब और बंगाल के मुस्लिम हुआ गैर मुस्लिम आबादी के आधार पर दो भागों में बांटने हेतु सीमा निर्धारण करना था। चार सदस्य इन आयोगों में 2 सदस्य कांग्रेस के तथा 2 सदस्य मुस्लिम लीग के शामिल थे।
दोनों राष्ट्र अपनी संविधान सभा में अपने लिए संविधान का निर्माण कर सकेंगे तथा उन्हें ब्रिटिश कॉमनवेल्थ से अभी तक होने का अधिकार होगा।
पूर्वी बंगाल, पंजाब, सिंध , पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम का सिलहट जिला पाकिस्तान में तथा शेष भाग को भारत में सम्मिलित होना था।
इस प्रकार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार क्रम से क्रमशः 14 वा 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा भारत नामक दो डोमिनियन राज्यों का गठन किया गया तथा 15 अगस्त 1945 से 26 जनवरी 1950 तक भारत का राजनीतिक, दर्जा ब्रिटिश औपनिवेशिक राज्य का था।