रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे (part 1)

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था , रोजगार के अवसर पैदा करने में मात खा रही है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।। आर्गेनाईजेशन ऑफ इकॉनॉमिक कार्पोरेशन एण्ड डवलपमेंट के भारतीय आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 2017 में भारत के 15 से 29 आयु वर्ग के 30 प्रतिशत युवा बेरोजगार हैं। मार्च 2018 में सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी के द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार फरवरी 2018 तक 3.1 करोड़ युवा बेरोजगार थे। एक अनुमान के अनुसार 2018 में रोजगार के मात्र 6 लाख अवसर ही उपलब्ध हो सके हैं।

भारत के आर्थिक विकास के लिए बेरोजगारी की यह स्थिति खतरनाक है। दूसरी ओर, रोजगार के नए अवसरों के निर्माण को भारत में चल रही विकास चुनौतियों का सामना करने की दिशा में रामबाण माना जा रहा है।

बेरोजगारी का समाधान ढूंढकर देश की तीन बड़ी मुख्य समस्याओं- सामाजिक अशांति और अपराध , गरीबी और भूख; तथा स्वास्थ्य और जन-कल्याण से निपटा जा सकता है। ये तीनों ही कारण ऐसे हैं, जो हमारे जीवन की गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी होते हैं। साथ ही राष्ट्र की स्थिरता के लिए भी ये आवश्यक हैं।

सामाजिक अशांति :-

पिंकप्टन और फिक्की की भारतीय रिस्क सर्वे से जुड़ी छठी रिपोर्ट में ‘हड़ताल, बंद एवं अशांति’ को अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए सबसे ज्यादा दोषी माना गया है। स्वाभाविक रूप से देश का व्यवसाय इससे प्रभावित होता है। रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न करना ही इस समस्या का समाधान हो सकता है। इसके माध्यम से लोग आपस में विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, उनमें आत्म-सम्मान की भावना बढ़ती है, और आपसी विश्वास भी बढ़ता है। सबसे अहम् बात यह है कि रोजगार प्राप्त व्यक्ति देश के एक उत्तरदायी नागरिक के रूप में परिवर्तित हो जाता है। इससे देश में स्थिरता बढ़ती है।

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