तेजी से बढ़ता समुंद्र का तापमान

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनियाभर के महासागर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहे हैं। उनकी रिसर्च में पता चला है कि इसकी वजह यह है कि धरती द्वारा अवशोषित लगभग सभी अतिरिक्त गर्मी पानी में जमा हो रही है और उस पर ज्यादा असर डाल रही है। साइंस जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित एक नए विश्लेषण में पाया गया कि पांच साल पहले अनुमानित संयुक्त राष्ट्र के पैनल की तुलना में महासागर औसतन 40 प्रतिशत तेजी से गर्म हो रहे हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि समुद्र का तापमान लगातार पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
स्वतंत्र जलवायु अनुसंधान समूह बर्कले अर्थ में ऊर्जा प्रणाली विश्लेषक और अध्ययन के लेखक ज़ेक हॉसफादर कहते हैं, '2016 बहुत गर्म साल था, 2017 उससे भी ज्यादा गर्म साल था। अब 2018 पृथ्वी के महासागरों के लिए रिकॉर्ड स्तर पर सबसे गर्म वर्ष होने जा रहा है।' उनका कहना है कि महासागरों ने मनुष्यों द्वारा वायुमंडल में पंप की गई ग्रीनहाउस गैसों की 93 प्रतिशत गर्मी को अवशोषित करके जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को धीमा कर दिया है। रटगर्स यूनिवर्सिटी में इकोलॉजी, डेवलपमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेस डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर मालिन एल पिंस्की कहते हैं, 'यदि महासागर इतनी गर्मी अवशोषित नहीं करें, तो धरती की सतह अभी की तुलना में बहुत तेजी से गर्म हो जाएगी। वास्तव में महासागर हमें बड़े पैमाने पर गर्मी से बचा रहे हैं।'
वैज्ञानिकों के मुताबिक महासागर गर्मी से तो बचा रहे हैं, लेकिन पानी का बढ़ता तापमान समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को खत्म करता जा रहा है। यह समुद्र का स्तर बढ़ा रहा है और तूफान को अधिक विनाशकारी बना रहा है। जैसे-जैसे महासागरों की गर्मी बढ़ेगी, ये प्रभाव अधिक विनाशकारी हो जाएंगे। 2017 में आए हार्वे और 2018 में आए फ्लोरेंस जैसे भारी बारिश वाले और शक्तिशाली तूफान आना आम बात हो जाएगी। इससे दुनिया भर के समुद्र तटों पर ज्यादा बाढ़ आने लगेगी।
कंजरवेशन ग्रुप ओशियाना के डिप्टी चीफ साइंटिस्ट कैथरीन मैथ्यूज़ कहती हैं,'ट्रॉपिक यानी कटिबंधिय क्षेत्र में रहने वाले लोग, जो प्रोटीन के लिए मछली पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं, उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। भोजन के उत्पादन के लिए गर्म महासागरों की वास्तविक क्षमता बहुत कम है। इसका मतलब है कि वे जल्द ही खाद्य असुरक्षा तक पहुंचने जा रहे हैं।' वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र के बढ़ते तापमान की वजह से मूंगे की चट्टानें और लाखों लोगों की आबादी के भोजन और आजीविका का स्रोत मछली भारी दबाव में आ जाएंगे। पिछले 3 साल में दुनिया भर के महासागरों में स्थित मूंगों की चट्टानों का करीब पांचवां हिस्सा खत्म हो चुका है। © The 
वैज्ञानिक 18 साल पहले से माप रहे हैं महासागरों का तापमान
दुनिया भर के वैज्ञानिक वर्ष 2000 यानी करीब 18 साल से दुनिया भर के महासागरों के तापमान पर नजर बनाए हुए हैं। समुद्र की गर्मी नापने के लिए वे ड्रिफ्टिंग फ्लोट्स नेटवर्क अर्गो (Argo) का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रीक मायथोलॉजी में वर्णित जैसन्स शिप के नाम पर इसका नाम रखा गया है। यह तैरते हुए यंत्र समुद्र की ऊपरी 6,500 फीट का तापमान और नमक को मापते हैं और उपग्रहों के माध्यम से डेटा अपलोड करते हैं। लेकिन अर्गो से पहले शोधकर्ताओं ने टेम्परेचर सेंसर पर भरोसा किया जिन्हें तांबे के लंबे-लंबे तारों के साथ समुद्र की गहराई में उतारा गया।

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