पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा स्थापित ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल' , कंपनी के ऊपर अपना नियंत्रण नहीं रख सका । भारत में कंपनी की दोहरी शासन व्यवस्था उत्तरदायित्वहीन, असुविधाजनक तथा जटिल हो गई थी। जिसके कारण 1857 की राज्यक्रांति हुई। फल स्वरुप तत्कालीन प्रधानमंत्री पामस्टर्न ने कंपनी शासन की समाप्ति हेतु विधेयक प्रस्तुत किया परंतु पारित न हो सका।
भारत परिषद अधिनियम 1861 द्वारा वायसराय को परिषद द्वारा अधिक कुशलता से कार्य संपादन हेतु नियम बनाने की शक्ति दी गई। वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने विभिन्न विभिन्न विभाग भिन्न-भिन्न सदस्य को दे दिए जो उसके प्रशासन के लिए उत्तरदाई थे।इस प्रकार भारत में ‘मंत्रिमंडलीय व्यवस्था' की शुरुआत हुई।
1858 की अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय कहा जाने लगा। गवर्नर जनरल और वायसराय एक ही होता था ।जब वह ब्रिटिश प्रांतों का शासन देखता था तब गवर्नर जनरल तथा भारतीय राजाओं के साथ ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था तब वायसराय के कहलाता था।
अप्रैल 1858 में संसद ने दूसरा विधेयक (भारत सरकार अधिनियम 1958 ) , एक्ट फॉर द बैटर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया नाम से पारित किया । इसके द्वारा भारत में कंपनी का शासन समाप्त कर सम्राट के हाथ में सौंप दिया गया। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर तथा बोर्ड ऑफ कंट्रोल को समाप्त कर दिया गया। भारत में शासन संचालन के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल में एक सदस्य के रूप में ‘भारत के राज्य सचिव' की नियुक्ति की गई। वह अपने कार्यों के लिए ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदाई होता था । उसकी सहायता हेतु 15 सदस्यीय ‘भारत परिषद' का गठन किया गया था। इसके 8 सदस्य ब्रिटिश सरकार (सम्राट) द्वारा तथा 7 सदस्य कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा मनोनीत किए जाते थे। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और कंट्रोल के सभी अधिकार भारत सचिव तथा उसकी परिषद को सौंप दिए गए। इस प्रकार इस अधिनियम द्वारा भारतीय मामलों पर ब्रिटिश संसद का सीधा नियंत्रण स्थापित हो गया।
भारत के गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया।
1 नवंबर 1858 को ब्रिटिश साम्राज्ञी विक्टोरिया ने भारत के संबंध में एक महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणा की थी जिसे भारत के शिक्षित वर्ग द्वारा अपने अधिकारों का मैग्नाकार्टा कहा गया।
भारत परिषद अधिनियम 1861 द्वारा वायसराय को परिषद द्वारा अधिक कुशलता से कार्य संपादन हेतु नियम बनाने की शक्ति दी गई। वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने विभिन्न विभिन्न विभाग भिन्न-भिन्न सदस्य को दे दिए जो उसके प्रशासन के लिए उत्तरदाई थे।इस प्रकार भारत में ‘मंत्रिमंडलीय व्यवस्था' की शुरुआत हुई।
1858 की अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय कहा जाने लगा। गवर्नर जनरल और वायसराय एक ही होता था ।जब वह ब्रिटिश प्रांतों का शासन देखता था तब गवर्नर जनरल तथा भारतीय राजाओं के साथ ब्रिटिश सम्राट के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था तब वायसराय के कहलाता था।