प्रक्षेपास्त्र टेक्नीक (missile technology) के विषय में उपयोगी जानकारी

प्रक्षेपास्त्र ऐसे विस्फोटक आस्त्र होते हैं जिन्हें हवा में प्रमोचित किए जाने के बाद या तो प्रक्षेप्य की तरह स्वतंत्र रूप से गिरते हैं या अपने पटल (बोर्ड) पर लगे कंप्यूटरों के द्वारा निर्देशित होते हैं।
प्रक्षेपास्त्र दो प्रकार के होते हैं बैलेस्टिक तथा क्रूज़।

बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (बैलेस्टिक मिसाइल) :-
इस श्रेणी के मिसाइल एक बार कंप्यूटर के द्वारा आवश्यक ऊंचाई प्राप्त करने के बाद अपने लक्ष्य को भेदने के लिए स्वतंत्र रूप से प्रक्षेप्य गति के अधीन गति करने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। यह चार प्रकार के होते हैं जिनका वर्णन निम्नलिखित है :-

कमदूरी  के बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (short range ballistic missile) :- इनका परास150 किलोमीटर से 799 किलोमीटर होता है।

निम्न मध्यम दूरी की बैलेस्टिक प्रक्षेपास्त्र (मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल) :- परास 800 किलोमीटर से 2399 किलोमीटर होता है।

मध्यम दूरी की बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (intermediate range ballistic missile या (IRBM) :- परास 2400 किलोमीटर से 5499 किलोमीटर है।

अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल या आईसीबीएम) :- परास 5500 किलोमीटर से ऊपर।


क्रूज मिसाइल (cruise missile):-

इस श्रेणी के प्रक्षेपास्त्र क्रूज ऊंचाई (12 किलोमीटर) पर उड़ते हैं।ये अपने प्रक्षेपास्त्र अपने बोर्ड पर लगे कंप्यूटर के द्वारा अपने दिशा को आवश्यकता अनुसार परिवर्तित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता भी होती है । भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस इसी श्रेणी का प्रक्षेपास्त्र है।

महत्व के आधार पर भी प्रक्षेपास्त्रोंं को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- 

टैक्टिकल (tactical) :- युद्ध स्थल में ही तुरंत प्रयोग किए जाते हैं।

सामरिक (strategic) :- दुश्मन के ठिकानों पर दूर तक मार करने की क्षमता रखते हैं।

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