दामोदर घाटी परियोजना

परियोजना भारत की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना है।
झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में फैली दामोदर घाटी का संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना के आधार पर संयुक्त विकास के लिए वर्ष 1948 में दामोदर घाटी निगम की स्थापना की गई। 
दामोदर नदी छोटा नागपुर की पहाड़ियों से निकलकर पश्चिम बंगाल में हुगली नदी से मिल जाती है।
संपूर्ण परियोजना के अंतर्गत आठ बांध एक अवरोधक बांध तथा बांधों के निकट जल विद्युत उत्पाद केंद्रों के अतिरिक्त बोकारो, चंद्रपुरा तथा दुर्गापुर में तीन तापीय विद्युत-ग्रह तथा लगभग 2500 किमी लंबी शहरों का निर्माण किया गया है।
इनमें तिलैया, कोनर, मैथान, पंचेत पहाड़ी, दुर्गापुर  अवरोध अय्यर बाल पहाड़ी तथा बर्मो नामक 8 बांध बनाए गए हैं।
दामोदर नदी के निचली घाटी में लगभग 2000 वर्ग किलोमीटर छेत्र की जल निकास व्यवस्था में सुधार संभव  हो सका है।
इस पर परियोजना के अंतर्गत स्थापित किए गए विद्युत ग्रहों से देश की लगभग 10% विधुत शक्ति का उत्पादन होता है। विद्युत उत्पादन क्षमता 2.6 किलोवाट है।
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