कुछ प्रमुख चैत्य
पीतल खोरा का चैत्य
यह चैत्य औरंगाबाद से चालीस गाँव जाने वाले मार्ग पर शतपुड़ा नामक पहाड़ी पर स्थित है। इसे प्राचीन काल में पीतल्य कहा जाता था।
चैत्य गृह का आकार 35.68 फीट का था,जिसमें 37 अष्टांशिक स्तम्भ बने थे। तथा वर्तमान में 12 शेष बचे हुए है।
भांजा का चैत्य
यह चैत्य महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। यहाँ पर कुल 22 गुफाएँ है।
कान्हेरी का चैत्य
यह चैत्य बम्बई के बोरिवली स्टेशन से 8 किमी0 दूर स्थित है, यहाँ पर कुल 30 गुफाएँ है।
कार्ले का चैत्य
यह चैत्य गुफा दूसरी शदी ई0 पू0 में महाराष्ट्र के पुणे जिले में ढ़ोरघाट नामक पहाड़ी पर बनाया गया है।
यह सभी चैत्य गुफाओं मे सर्वश्रेष्ठ है तथा यह चैत्य अपनी वास्तु सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है।
चैत्यों के अन्दर बने छोटे स्तूप को दागोब कहा जाता है।
गुहा लेख/गुफा लेख
बराबर की गुहा/गुफा
यह गुफा बिहार राज्य के गया जिले के बराबर की पहाड़ियों में स्थित है।
मौर्यकाल में इन पहाड़ियों को खतलिक पर्वत कहा जाता था।
इन पहाड़ियों को प्राचीनकाल में प्रवरगिरि तथा गोरथगिरि के नाम से भी जाना जाता था।
यहाँ पर कुल चार गुफाएँ प्राप्त हुयी है, जिनमें से प्रथम तीन निर्माण अशोक ने तथा चैथी गुफा दशरथ ने बनवाया था।
कर्ण चैपड़ गुफा।
सुदामा गुफा।
विश्व झोपड़ी गुफा।
लोमश ऋषि गुफा।
नागार्जुन की गुहा/गुफा
यह गुफा बराबर की पहाड़ियों के निकट गया (बिहार) में स्थित है। यहाँ पर कुल तीन गुफाएँ प्राप्त हुई थी।
इन गुफाओं का निर्माण अशोक के पुत्र दशरथ ने करवाया था और इन्हें आजीविकों को दान कर दिया था।
वहियक गुफा।
गोपी गुफा।
वडथिका गुफा।