कुछ अन्य प्रमुख मन्दिर
गरदमल मन्दिर
ऽ यह मंदिर मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्थित है। इसके गर्भगृह का आकार आयताकार है, इसमें अलंकृत स्तम्भ तथा पाँच पट्टिकाओं से युक्त प्रवेशद्वार है।
ऽ यह मन्दिर प्रतिहार शैली में निर्मित है।
सिरपुर लक्ष्मण मन्दिर
ऽ इस मन्दिर का निर्माण लगभग 7वीं शदी में प्रारम्भ हुआ जो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सेरपुर नामक स्थान पर बनाया गया है।
ऽ यह आर्य शैली में निर्मित मन्दिर है।
तेली का मन्दिर
ऽ ग्वालियर में स्थित तेली का मन्दिर प्रतिहार शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
चालुक्य कालीन प्रमुख मन्दिर
बादामी के मन्दिर
ऽ बादामी में पत्थर को काटकर चार स्तम्भ युक्त मण्डप बनाये गये है। यहाँ भगवान विष्णु के दो रीलीफ मूर्तियाँ है।
1. अनन्त पर बैठे हुए।
2. नरसिंह रूप में विष्णु।
एहोल के मंदिर
ऽ एहोल को मन्दिरों का नगर कहा जाता है।
ऽ यहाँ लगभग 70 मन्दिरों के अवशेष प्राप्त हुए है, जिसमें से कुछ प्रमुख मंदिरों का विवरण निम्न है-
1. लाढ़खा का मन्दिर- एहोल के मन्दिर मे लाढ़खा का मन्दिर सर्वप्रमुख है। यह सूर्य देवता का मन्दिर है। इस मन्दिर की छत चपटी एवं शिखर विहीन है।
2. देवी दुर्गा का मन्दिर- इस मन्दिर का निर्माण चबूतरे पर किया गया है। यह एहोल का दूसरा प्रमुख मन्दिर है।
3. जिनेन्द्र का मन्दिर- इस मन्दिर का निर्माण पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी विद्वान रविकीर्ति द्वारा करवाया गया था। यह जैन मन्दिर है।
पत्तलकड़ के मन्दिर
ऽ पत्तलकड़ में कुल 10 मन्दिरों के बारे में जानकारी प्राप्त हुयी है, जिसमें 4 नागर शैली और 6 द्रविड़ शैली में निर्मित है।
ऽ 680 ई0 में निर्मित पापनाथ मन्दिर तथा 740 ई0 में निर्मित विरूपाक्ष मन्दिर यहाँ का सबसे प्रसिद्ध मन्दिर है।
ऽ विरूपाक्ष मन्दिर का निर्माण विक्रमादित्य की रानी लोक महादेवी ने करवाया था।