दक्षिण भारत के प्रमुख मन्दिर
राजसिंह राजेश्वर/काँची का कैलाश मंदिर
ऽ इस मंदिर का निर्माण नरसिंह वर्मन द्वितीय उर्फ राजसिंह ने करवाया था।
ऽ द्रविण स्थापत्य की विशेषताओं से युक्त यह भारत का प्रथम मन्दिर है।
बैकुण्ठ पेरूमल मंदिर
ऽ इस मंदिर का निर्माण काँची (तमिलनाडु) में नन्दिवर्मन द्वितीय ने कराया था।
तटीय/शोर मन्दिर
ऽ इस मन्दिर का निर्माण नरसिंह वर्मन द्वितीय ने करवाया था।
महाबलीपुरम् का रथ मन्दिर
ऽ नरेश नरसिंह वर्मन प्रथम/मामल्ल ने महाबलीपुरम् में सात रथ मन्दिर का निर्माण कराया जिसे सप्त पगोड़ा कहा गया।
युधिष्ठिर रथ भीम रथ अर्जुन रथ
नकुल एवं सहदेव रथ द्रोपदी रथ पिंडारी रथ
ब्लैथन कुटटैथ रथ
ऽ उपरोक्त रथ मन्दिर में सबसे अलंकृत रथ युधिष्ठिर रथ को माना जाता है तथा अलंकारविहीन एवं सबसे छोटा रथ द्रोपदी रथ को बताया गया।
चोल कालीन प्रमुख मन्दिर
तंजौर का बृहदेश्वर/राजराजेश्वर मंदिर
ऽ इस मन्दिर का निर्माण 1000 ई0 के लगभग राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया।
ऽ इस मन्दिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग है तथा इसके विमान में 13 मंजिले है।
गंगैकोड चोलपुरम् का शिव मंदिर
ऽ इस मन्दिर का निर्माण 1025 ई0 में चोल शासक राजेन्द्र प्रथम द्वारा कराया गया।
चिदम्बरम् का नटराज मंदिर
ऽ इस मन्दिर का निर्माण 16वीं शदी ई0 में विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय ने करवाया तथा 10वीं शदी ई0 में परान्तक प्रथम ने इस मन्दिर को सोने से अलंकृत करवाया था।