आइंस्टाइन का जन्म से दक्षिण जर्मनी 14 मार्च 1879 में हुआ। आइंस्टाइन ने स्नातक की उपाधि इंटरनेशनल फेडरल पॉलिटेक्निक संस्थान,ज्यूरिक से प्राप्त। आइंस्टाइन को स्विट्जरलैंड की नागरिकता 1901 में प्राप्त हुई। अपेक्षिकता का सिद्धांत उनके जीवन की महान उपलब्धि थी। आइंस्टाइन को भौतिक शास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रकाश विद्युत प्रभाव के लिए 1921 में मिला । आपेक्षिकता का सिद्धांत किसी त्वरित वस्तु से संबंधित है।
आइंस्टाइन एक महान वैज्ञानिक के साथ एक अच्छा वायलिन वादक भी था। 5 साल की उम्र से ही वायलिन उनके जीवन का अभिन्न अंग था। बाख, मोटर्ससार्ट्, आइंस्टाइन के पसंदीदा संगीतकार थे। आइंस्टीन का पहला शोध निबंध केशिका क्रिया से संबंधित जो 1901 में आनलेन डेर फिजिक में प्रकाशित हुआ था।
आइंस्टाइन शांति के महान पुजारी थे ।यही कारण है कि प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के पहले जर्मनी की सैनिक नीतियों का समर्थन करने वाला ‘सभ्य संसार के घोषणा' पत्र पर उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। गांधी जी के आर्थिक कार्यक्रमों के आलोचक होने पर भी आइंस्टाइन के मन में गांधी जी के जीवन दर्शन और उनके आहिंसात्मक आंदोलन के लिए आगाध श्रद्धा थीं। आइंस्टाइन ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अनुरोध पर ‘गांधी ग्रंथ’ के लिए भेजे गए लेख में उनकी प्रशंसा में लिखा की हम सबको इस बात के लिए खुश होना चाहिए कि एक ऐसा श्रेष्ठ व्यक्ति हमारा समकालीन है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा। 3 से 6 नवंबर,1952 को हिरोशिमा में आयोजित विश्व राज्य संघ के एशियाई सम्मेलन को भेजे अपने संदेश में आइंस्टाइन ने गांधी जी को अपने समय की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिभा की शादी संज्ञा दी।
यह सच है कि यहूदियों के जर्मनी द्वारा नृशंस हत्या से अतिकलेशित हो परमाणु बम बनाने के लिए पत्र आइंस्टाइन ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट को पत्र प्रेषित किया था, लेकिन जर्मनी के आत्मसमर्पण के पश्चात उन्होंने बम प्रयोग न करने के लिए पत्र भी भेजे थे , पर रुजवेल्ट की असमय मृत्यु के कारण इस पत्र का कोई महत्व नहीं था। ब्रिटिश गणितज्ञ ब्रट्रांड के द्वारा तैयार ‘रसेल आइंस्टाइन घोषणा पत्र ’ जो शांति के लिए चलाए जा रहे पगवाश आंदोलन का आधार है जिस पर खुशी-खुशी हस्ताक्षर किए थे ।
18 अप्रैल 1955 को उदर की महाधमनी में रक्तस्राव होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई।