कोहिनूर का इतिहास भाग- 1

कोहिनूर की खोज 
माना जाता है कि 13वीं सदी में दक्षिण भारतीय हिंदू काकतीय वंश के दौर में इसे आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के हीरे के प्रसिद्ध कोलार खान से खोजा गया था उस समय इसका भार 793 कैरेट (158.6 ग्राम) था।

दिल्ली सल्तनत
खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी के जनरल मलिक काफूर ने 1310 ईस्वी में काकतीय वंश की राजधानी वारंगल पर हमलाकर लूटा था । वहां से वह कोहिनूर को दिल्ली लेकर आया दिल्ली सल्तनत के विभिन्न शासकों के बाद यह मुगल वंश के नियंत्रण में आया हुमायूं के संस्मरण में इसका उल्लेख मिलता है पांचवे मुगल शासक शाहजहां के मयूर सिंहासन में यह जड़ा गया था औरंगजेब के दौर में इसे काटा गया उसके बाद इसका भार घटकर 186 कैरेट (37.2) ग्राम रह गया।
 
नादिर शाह
1739 फारस के शाह नादिर शाह (ईरान का नेपोलियन) ने दिल्ली पर आक्रमण किया। उसने कमजोर पड़ चुके मुगल सम्राज्य के खजाने को लूटा। उसे अन्य महत्वपूर्ण सामग्री के साथ मयूर सिंहासन में कोहिनूर मिला। वह इसे साथ ले गया और वहीं से इसे कोहिनूर (माउंटेन आफ लाइट) नाम मिला।

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