सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं का प्रवेश

➡ 28 सितंबर,  2018 को सर्वोच्च न्यायालय के 5  न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4-1 के बहुमत से सबरीमाला स्थित अय्यप्पा मंदिर में 10-50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के विरुद्ध करार देते हुए प्रतिबंध को समाप्त करने का निर्णय सुनाया ।

➡ सर्वोच्च न्यायालय ने 'केरल हिंदू सार्वजनिक पूजा स्थल अधिनियम, 1965' के नियम 3(b),  जिसमें सबरीमाला मंदिर में रजस्वला स्त्रियों का प्रवेश वर्जित था ,को असंवैधानिक करार दिया ।

➡ निर्णय के अनुसार उपर्युक्त अभ्यास से संविधान के अनुच्छेद 14 ,15 ,25, तथा 51A(e) का उल्लंघन होता है।

➡ 5 न्यायाधीशों की पीठ में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, ए.एम.खानविलकर, डी. वाई. चंद्रचूड़, आर.एफ. नरीमन ने बहुमत का निर्णय लिया,  जबकि पीठ की एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने बहुमत से अलग निर्णय दिया ।

➡  न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने धार्मिक आचरण के मामले में न्यायपालिका को हस्तक्षेप न करने का निर्णय दिया ।

➡  यह निर्णय इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य वाद में आया है , जो वर्ष 2006 में दायर किया गया था।

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