➡ 26 सितंबर , 2018 को आधार की अनिवार्यता से जुड़ी याचिकाओं पर 38 दिनों तक सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने बहुमत से आधार को संवैधानिक ठहराया ।
➡ 5 न्यायाधीशों, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ए. क. सीकरी , ए. एम. खानविलकर, डी.वाई.चंद्रचूड़ , और अशोक भूषण में से डी.वाई.चंद्रचूड़ और अशोक भूषण ने अलग से निर्णय दिया ।
➡ न्यायमूर्ति डी. वाई . चंद्रचूड़ ने आधार अधिनियम 2016 की धारा 7 (जिसमें आधार को लाभ और सेवाओं के लिए अनिवार्य किया गया है ) को असंवैधानिक ठहराया, साथ ही आधार को धन विधेयक के रूप में पारित करने के कारण पूरे अधिनियम को असंवैधानिक ठहराया।
➡ न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने आधार अधिनियम की धारा 57 ( जिसमें निजी कंपनियों को आधार डाटा के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है ) को असंवैधानिक ठहराया , साथ ही किसी विधेयक को धन विधेयक का दर्जा देने की लोक सभा अध्यक्ष की शक्ति को न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन ठहराया ।
➡ निर्णय के अनुसार, पैन कार्ड बनवाने ,आयकर रिटर्न दाखिल करने, सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए आधार अनिवार्य है ।
➡ इसके अतिरिक्त मोबाइल नंबर , बैंक खाता, संस्थाओं में प्रवेश और परीक्षा तथा बच्चों को मिलने वाले सरकारी लाभ के लिए आधार अनिवार्य नहीं है ।
➡ उल्लेखनीय है कि केशवानंद भारती वाद के बाद सर्वाधिक समय तक मौखिक सुनवाई आधार को लेकर हुई।।