भारत का राष्ट्रगान 107 साल पहले गाया गया था जन गण मन

राष्ट्रगान की आचार संहिता के तहत राष्ट्रगान गाते समय नियमों और नियंत्रणों के समुच्चय को लेकर भारतीय सरकार समय-समय पर निर्देश देती है।

  • कुछ अवसरों पर राष्ट्रगान संक्षिप्त रूप में भी गाया जाता है। इसमें प्रथम और अंतिम पंक्तियां ही बोलते हैं। इसमें लगभग 20 सेकेंड का समय लगता है।

  • राष्ट्रगान का अपमान करने या इसे गाने से रोकने या परेशान करने पर संबंधित व्यक्ति अथवा ग्रुप के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टु नेशनल ऑनर एक्ट-1971 की धारा-3 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

  • इसके अपमान का दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

  • गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए राष्ट्रगान में पांच पद हैं। राष्ट्रगान के रूप में इसके पहले पद को ही अपनाया गया।

  • नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने ही अपनी आजाद हिंद फौज में ‘जय हे’ नाम से इस गीत को अपनाया था। जन गण मन का पहली बार प्रकाशन 1912 में तत्वबोधिनी नामक पत्रिका में हुआ था। तब इसका शीर्षक रखा गया था भारत विधाता।

  • तेलंगाना के जम्मीकुंटा गांव और हरियाणा में फरीदाबाद जिले के भनकपुर गांव में हर सुबह सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया जाता है।

  • राष्ट्रगान को लेकर पहला विवाद 1987 में सामने आया था, जो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। केरल के एक स्कूल के कुछ विद्यार्थियों को स्कूल ने इसलिए निकाल दिया था, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया था।

  • सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान पता चला कि ये विद्यार्थी स्कूल में राष्ट्रगान के दौरान इसके सम्मान में खड़े होते थे। इस पर अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगान का सम्मान करता है, लेकिन उसे गाता नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह उसका अपमान कर रहा है ।

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