भारत का प्रायद्वीपीय पठार

प्रायद्वीपीय पठार का विस्तार उत्तर भारत के विशाल मैदान के दक्षिण से आरंभ होकर कन्याकुमारी के निकट तथा 1600 वर्ग किलोमीटर की लंबाई में है इस पठार का पूर्वी सीमा पूर्वी तटीय मैदान और पश्चिमी सीमा पश्चिमी तटीय मैदान, उत्तरी पश्चिमी सीमा अरावली पर्वत श्रृंखला, उत्तरी सीमा विंध्या के उत्तरी कागार  राजमहल तथा गारो ,खासी ,जयंतिया द्वारा निर्धारण होती हैं

इस प्रकार यह नियमित त्रिभुजाकार पठार है जिसका आधार दिल्ली (कटक )से राजमहल पहाड़ियों तक तथा शीर्ष कन्याकुमारी के निकट है!

यह पठार लगभग 1600000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला देश का सबसे बड़ा तथा प्राचीनतम भू आकृति प्रदेश है

इसका समुद्र तल से औसत ऊंचाई 600 मीटर से 900 मीटर की मध्य है यह अन एक पर्वत पहाड़ पहाड़ियां नदी घाटियां द्वारा अनेक छोटे-छोटे भागों में विभक्त है जिन्हें द्वितीय कोट का पठार कहते हैं

जैसे- मालवा का पठार, बुंदेलखंड पठार, बघेलखंड पठार ,मैकाल पठार ,दक्कन ट्रैप ,काठियावाड़ का पठार ,छोटा नागपुर पठार ,मेघालय पठार ,दंडकारण्य पठार ,तेलंगाना पठार , कर्नाटक पठार ,कोयंबटूर पठार इत्यादि है

प्रायद्वीपीय पठार को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है

(1) केंद्रीय  या मध्यवर्ती प्रदेश उच्च भूमि

(2) दक्षिण भारत का पठार

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