क्या है झूम खेती ?

झूम कृषि एक पुरानी खेती का प्रकार है जिसमें पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है और साफ की गई भूमि को पुराने उपकरणों (लकड़ी के हलों आदि) से जुताई करके बीज बो दिये  जाते हैं। फसल पूर्णत: प्रकृति पर निर्भर होती है और उत्पादन बहुत कम होता है। 

कुछ वर्षों तक (2 या वर्ष तक )जब तक मिट्टी में उर्वरता विद्यमान रहती है इस भूमि पर खेती की जाती है। इसके बाद इस भूमि को छोड़ दिया जाता है जिस पर पुन: पेड़-पौधे उग आते हैं। अब अन्यत्र जंगली भूमि को साफ करके कृषि के लिए नई भूमि प्राप्त की जाती है। और उस पर भी कुछ वर्ष तक खेती की जाती है। इस प्रकार या एक स्थानांतरणशील कृषि(shiftingcultivation)है जिसमें थोड़े थोड़े समय के अंतर पर खेत बदलते रहते हैं। भारत की पूर्वोत्तर पहाड़ियों में आदिम जातियों द्वारा की जाने वाले इस प्रकार की कृषि को झूम कृषि करते हैं यह खेती मुख्य उष्णकटिबंधीय वन प्रदेशों में की जाती है।

इस प्रकार के स्थानांतरी कृषि को श्रीलंका में चेना, इंडोनेशिया में लदांग , फिलीपींस में कैंगिन ,मध्य अमेरिका और मेक्सिको में मिल्पा , वियतनाम में रे , म्यांमार में तौंग्या , थाईलैंड में तमरै , वेनेजुएला में कोनुको  , ब्राजील में रोका और मध्य अफ्रीका में मोसले कहते हैं।

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