महाराजा रणजीत सिंह
1747 ईस्वी में नादिर शाह की हत्या और उसके साम्राज्य के पतन बाद उसके एक जनरल और अफगानिस्तान के अमीर अहमद शाह दुर्रानी के हाथ कोहिनूर लगा। उसका एक वंशज शुजा शाह दुर्रानी एक ब्रेसलेट में इसे धारण करता था। अपने दुश्मनों से घिरने के बाद शुजा साह 1813 ईस्वी में लाहौर आया। वहां महाराजा रणजीत सिंह से वह मिला उनके स्वागत के बदले में कोहिनूर उसने रणजीत सिंह को दे दिया।
अंग्रेजों का कब्जा
महाराजा रणजीत सिंह ने इसे जगन्नाथपुरी को दान करने की इच्छा जताई थी लेकिन 1839 ई. में उनकी मृत्यु होने के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया ने उनकी इच्छा पूरी नहीं की थी।
मार्च 1849 ईसवी में द्वितीय आंग्लसिख युद्ध के बाद पंजाब रियासत को ब्रिटिश भारत में शामिल कर लिया गया लाहौर संधि के अंतर्गत कोहिनूर को गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने ब्रिटिश सामग्री महारानी विक्टोरिया के पास भेज दिया था 1852 ईसवी में महारानी विक्टोरिया के पति प्रिंस अल्बर्ट के आदेश पर इसे पुनः काटा गया उसके बाद यह 42% हल्का होकर 105.6 कैरेट (21.12 ग्राम) का रह गया।
स्वतंत्रता के बाद से भारत और पाकिस्तान इस पर अपना दावा करते हुए इसे पुनः मांगते रहे हैं ।अफगानिस्तान भी इस पर पर अपना दावा करता रहा है।