अविश्वास प्रस्ताव :- अविश्वास प्रस्ताव सदन में विपक्षी दल के किसी सदस्य द्वारा रखा जाता है। प्रस्ताव के पक्ष में कम से कम 50 सदस्यों का होना आवश्यक है तथा प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने के 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा होना भी आवश्यक है। चर्चा के बाद अध्यक्ष मतदान द्वारा निर्णय की घोषणा करता है
मूल प्रस्ताव :- मूल प्रस्ताव अपने आप में संपूर्ण प्रस्ताव होता है , जो सदन के अनुमोदन के लिए पेश किया जाता है। मूल प्रस्ताव को इस तरह से बनाया जाता है कि उसे सदन के फैसले की अभिव्यक्ति हो सके। निम्नलिखित प्रस्ताव मूल प्रस्ताव होते हैं
1. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद पत्र
2. इस प्रस्ताव के माध्यम से सदन मंत्री परिषद में अपना विश्वास व्यक्त करता है और यदि यह प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है , तो मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है । यह प्रस्ताव और केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
3. लोकसभा के अध्यक्ष , उपाध्यक्ष या राज्यसभा के उपसभापति के निर्वाचन के लिए या हटाने के लिए प्रस्ताव।
4. विशेषाधिकार प्रस्ताव यह प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है , जब उसे यह प्रतीत होता है कि मंत्री परिषद के किसी सदस्य ने संसद में झूठा तथ्य प्रस्तुत करके सदन को गुमराह किया है अथवा अपनी किसी के द्वारा किसी मंत्री या कार्यपालिका के सदस्य ने सदन के सदस्य की व्यक्तिगत रूप से या सदन की अवमानना की है तो सदस्य इस आशय की सूचना देने क अध्यक्ष / सभापति के माध्यम से सदन को देते हैं। इसे ही विशेषाधिकार का हनन खा गया है। नियमों के अनुसार व्यक्ति को सदन के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना पड़ता है , दोष प्रमाणित होने पर सदन चाहे तो उसे क्षमा कर सकता अथवा उसे दंडित कर सकता है।