स्थानापन्न प्रस्ताव :- जो प्रस्ताव मूल प्रस्ताव के स्थान पर और उनकी विकल्प के रूप में पेश किए जाते हैं उन्हें स्थानापन्न प्रस्ताव कहा जाता है
अनुषंगी प्रस्ताव :- इस प्रस्ताव को विभिन्न प्रकार के कार्यों की अगली कार्यवाही के लिए नियमित उपाय के रूप में पेश किया जाता है।
प्रतिस्थापन प्रस्ताव :- यह किसी अन्य प्रश्न पर विचार विमर्श के दौरान पेश किया जाता है । कोई सदस्य किसी विधेयक पर विचार करने के प्रस्ताव के संबंध में प्रतिस्थापन प्रस्ताव पेश करते हैं
संशोधन प्रस्ताव : - संविधान में समय-समय पर आवश्यकता होने पर संशोधन करने पड़े हैं। विधायिनी सभा में किसी विधेयक में परिवर्तन, सुधार अथवा उसे निर्दोष बनाने की प्रक्रिया को 'संशोधन' कहा जाता है. प्रस्ताव के शोधन की क्रिया के लिए भी इस शब्द का प्रयोग होता है. किसी भी देश का संविधान कितनी ही सावधानी से बनाया जाए, परंतु समय के अनुसार इसमें परिवर्तन करने पड़ते हैं
अनियमित दिन वाले प्रस्ताव :- जिस प्रस्ताव को अध्यक्ष द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है , लेकिन उस प्रस्ताव पर विचार विमर्श के लिए कोई समय नियत नहीं किया जाता, उसे अनियमित दिन वाला प्रस्ताव कहा जाता है।
अध्यादेश :- राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल संसद अथवा विधान मंडल के सत्रावसान की स्थिति में आवश्यक विषयों से संबंधित अध्यादेश का प्रख्यापन करते हैं। अध्यादेश में निहित विधि संसद अथवा विधान मंडल के अगले सत्र की शुरुआत के 6 सप्ताह के बाद प्रवर्तन योग्य नहीं रह जाती। यदि संसद और विधान मंडल द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता।