- यह शरीर की कायिक कोशिकाओं में होता है।
- इसके फलस्वरूप कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या में कोई परिवर्तन नही होता।
- यह प्रक्रिया पांच प्रावस्थाओं में पूरी होती है।
- गुणसूत्रों के आनुवांशिक पदार्थ में आदान-प्रदान नहीं होता इसलिए संतति कोशिका में भी उसी प्रकार के गुणसूत्र होते हैं, जैसे जनक (पैतृक) कोशिका में।
- संतति कोशिका में जनक जैसे ही क्रोमोसोम होने के कारण आनुवंशिक विविधता नहीं होती।
- एक जनक से दो संतति कोशिकाएं बनती हैं।
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- यह केवल लैंगिक कोशिका में होता है।
- इसके फलस्वरूप संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है।
- यह विभाजन दो उप-विभाजनों में पूरा होता है जिसमें पहला न्यूनीकरण होता है। प्रत्येक उपविभाजन में 4-5 अवस्थाएं होती हैं।
- गुणसूत्रों के बीच आनुवांशिक पदार्थ का आदान-प्रदान होता है, इसलिए संतति कोशिका के गुणसूत्र में कुछ भाग पितृ कोशिका से, कुछ भाग मातृ कोशिका से आ जाता है। अतः संतति कोशिका के गुणसूत्र, जनकों के गुणसूत्र से भिन्न होते हैं।
- संतति कोशिकाओं में जनकों से भिन्न गुणसूत्र होने के कारण आनुवंशिक विविधता होती है।
- एक जनक से चार संतति कोशिकाएं बनती हैं।
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