-
कोहिनूर हीरा काकतीय वंश के शासन के दौरान गोदावरी तट पर स्थित गोलकुंडा, कोलार खान, आंध्र प्रदेश (भारत की पहली खदान) से प्राप्त हुआ था तथा इसी वंश के पास कई वर्षों तक रहा ।
-
1306 में अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण विजय अभियान के दौरान उसके सेनापति मलिक काफूर ने वारंगल, तेलंगाना पर सफल अभियान किया इस अवसर पर वहां के तत्कालिक शासक प्रताप रुद्र राय द्वितीय ने गफूर को यह हीरा भेंट किया उसके बाद यह दिल्ली सल्तनत की संपत्ति का अभिन्न अंग बन गया ।
-
1339 में इसे समरकंद लाया गया जहां पर यह लगभग 300 वर्षों तक रहा ।
-
दिल्ली सल्तनत की समाप्ति के समय हीरा इब्राहिम लोदी द्वारा बाबर को हस्तांतरित हुआ तथा मुगल वंश के परिवर्ती शासकों के अधिपति में रहा ।
-
पांचवी मुगल वंश के शासक शाहजहां ने इसे अपनी मयूर सिंहासन में जड़वा रखा था ।
-
1739 में ईरानी शासक नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण किया तथा मयूर सिंहासन के साथ कोहिनूर हीरा भी लूटकर ले गया और हीरो को कोहिनूर नाम दिया क्योंकि इसके पहले या अन्य नामों से जाना जाता था मुगल वंश के शासक इसे बाबर मणि कहते थे ।
-
नादिर शाह की हत्या करके उसके सेनापति अहमद शाह दुर्रानी ने हीरे को लूट लिया जो कालांतर में अफगानिस्तान का अमीर बना ।
-
उत्तराधिकार के युद्ध में सुजा शाह दुर्रानी (पुत्र ) भागकर पंजाब में महाराजा राणा रणजीत सिंह की शरण में आया तथा यह बेशकीमती हीरा भेंट किया बदले में रणजीत सिंह ने उसे पुनः सत्ता प्राप्ति में सहायता की ।