यह पठार केंद्रीय मध्यवर्ती उच्च भूमि के अंतर्गत आता है इसका विस्तार मध्य प्रदेश के उत्तर पश्चिम भागों में इसका उत्तरी सीमा अरावली का कागार दक्षिणी सीमा विंध्या पर्वत श्रृंखला तथा पूर्वी सीमा बुंदेलखंड पठार के द्वारा निर्धारित किया जाता है
इस पठार में अनेक प्रकार के शैल समूह उपस्थित हैं इस पठार के दक्षिणी भाग में क्रीटेशियस पीरियड का लावा का निक्षेप हुआ है तथा पूर्व भाग में विंध्या कर्म का बलुआ पत्थथर मिलता इस पठार का सामान्यता ऊंचाई 450 से 600 मीटर केे मध्य है इसकी कई चट्टान 900 मीटर से भी अधिक कुछ है
जैसे- डोंगर 1325 मीटर ,तोरणमल 1150 मीटर
मालाबार पठार के सर्वाधिक क्षेत्र पर लावा निर्मित बेसाल्ट चट्टान के अपक्षय अपरदन से काली मृदा विकसित हुआ है मालाबार पठार पर चंबल तथा इसके सहायक नदियों के बेसिन क्षेत्र में अवनालिका अपरदन हुआ है जिससे यह पठार उबड़ खाबड़ है इसके उत्खात भूमि को चंबल काा बीहड़ कहते हैं
यहां का औसत वर्षा 50 से 100 सेंटीमीटर के मध्य होता है इस कारण यहां शुष्क पतझड़ वनों का विस्तार है जिसमें भील उराव तथा संथाल जनजातियां निवास करती हैं।