:: राजस्थान में सभी किसान आंदोलन लाल बाग कर और बेगार कर के विरुद्ध हुए हैं।
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#लाटा और
#कूंता का संबंध उपज पर कर आंकने की पद्धति से हैं। किसानों से वसूल की जाने वाली विविध लाल-बागों का उल्लेख चीकली ताम्रपत्र से प्राप्त होता है।
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#बिजोलिया_किसान_आन्दोलन】
:: बिजोलिया ठिकाने की स्थापना राणा सांगा के समय
#अशोक_परमार द्वारा की गई। बिजोलिया वर्तमान में भीलवाड़ा जिले में स्थित है। बिजोलिया का प्राचीन नाम
#बिजयावली" था। बिजोलिया मेवाड़ रियासत का एक ठिकाना था। इसे ऊपरमाल की जागीर भी कहा जाता था।
:; भारत में एक संगठित किसान आंदोलन की शुरुआत का श्रेय मेवाड़ के बिजोलिया क्षेत्र को जाता है। इस आंदोलन का प्रमुख कारण जागीरदारों द्वारा अधिक लालबाग वसूलना था। बिजोलिया किसान आंदोलन में अधिकांश धाकड़ जाति के किसान थे। इसे राजस्थान का प्रथम और सबसे लंबा चलने वाला किसान आंदोलन माना जाता है।
:: 1897 में गिरधारीपुरा गांव से बिजोलिया किसान आंदोलन का आरंभ हुआ। बिजोलिया के किसानों ने मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह से जागीरदार के जुल्मों के विरुद्ध शिकायत करने हेतु
#नानजी और
#ठाकरी_पटेल को भेजा लेकिन महाराणा ने इस पर ध्यान नहीं दिया और बिजोलिया के तत्कालीन ठाकुर रामकृष्ण सिंह ने नानजी और ठाकरी पटेल को निर्वासित कर दिया।
:: कृष्ण सिंह के पुत्र पृथ्वी सिंह द्वारा तलवार बंधाई का कर लागू करने पर
#साधु_सीतारामदास
#फतेहकरण चारण और
#ब्रह्मदेव के नेतृत्व में किसानों ने भूमि को पड़त रख कर विरोध प्रकट किया और कोई कर नहीं दिया।
:: 1916 में साधु सीताराम के आग्रह पर विजय सिंह पथिक (
#भूपसिंह) इस आंदोलन से जुड़े तथा 1917 में ऊपरमाल किसान पंच बोर्ड की स्थापना की जिसका अध्यक्ष
#मन्नापटेल को बनाया गया।
:: किसानों की मांगों की जांच करने हेतु 1919 में "बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोग" बिजोलिया आया। जिसने 35 प्रकार के कर माफी की सिफारिश की। किंतु महाराणा ने अस्वीकार किया।
:: कानपुर से प्रकाशित
#प्रताप समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी) के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर इस आंदोलन को उजागर किया गया। कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप से 1922 में ए.जी.जी. हालैंड और किसानों के बीच एक समझौता हुआ जिसमें 84 में से 35 कर माफ कर दिए गए।
:: 1927 में विजय सिंह पथिक इस आंदोलन से अलग होने पर इसका नेतृत्व जमनालाल बजाज और हरिभाऊ उपाध्याय ने किया। 1931 में जमना लाल बजाज और मेवाड़ के प्रधानमंत्री सुखदेव प्रसाद के मध्य एक समझौता हुआ लेकिन उसका ईमानदारी से पालन नहीं किया गया। जागीरदारों द्वारा चंवरी कर लगाने के कारण बिजोलिया आंदोलन फिर से शुरू हो गया।
::1941 में मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी.वी. राघवाचार्य ने राजस्थान विभाग के मंत्री डॉ मोहन सिंह
#मेहता को बिजोलिया भेजकर किसानों की मांगे मानकर जमीने वापस कर दी,इसके बाद बिजोलिया आंदोलन समाप्त हो गया।
बिजोलिया किसान आंदोलन के प्रमुख कारण
● 84 प्रकार के लाल बाग कर
लाटा कूँता की समस्या
● बेगार प्रथा
● 1903-राव कृष्ण सिंह ने चंवरी की लाग(विवाह कर) लगाई
● 1906-राव पृथ्वी सिंह ने तलवार बंधाई की लाग (उत्तराधिकारी शुल्क) लगाई।