उड़ीसा के प्रमुख मन्दिर
उड़ीसा के भुवनेश्वरी और कोणार्क जिले में 8वीं शदी से 13वीं शदी के बीच मन्दिरों का निर्माण किया गया है।
उड़ीसा के मन्दिर प्रमुख रूप से नागर शैली में निर्मित किये गये है, तथा स्तम्भ के स्थान पर लोहे के गाटरों (शहतीरों) का प्रयोग किया गया है।
भुवनेश्वर का लिंगराज मन्दिर-
ऽ इस मन्दिर का निर्माण उड़ीसा के केशरी वंश के शासकों द्वारा तथा विकास अनन्तवर्मन चोड़ गंग ने करवाया।
कोणार्क का सूर्य मन्दिर-
ऽ इस मन्दिर का निर्माण नरेश सिंह वर्मन प्रथम द्वारा करवाया गया इसके प्रवेशद्वार पर 16 तीलियों से युक्त एक चक्र प्राप्त हुआ है, जिसे सूर्य चक्र कहा गया है।
ऽ काले पत्थर से निर्मित होने के कारण यह मन्दिर काला पगोड़ा के नाम से प्रसिद्ध है। सम्पूर्ण मन्दिर सात घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा हेै और दो गजगर्दन शेर प्रवेश द्वार की रक्षा कर रहा है।
पुरी का जगन्नाथ मन्दिर-
ऽ यह मन्दिर नागर शैली में बना है तथा इसका निर्माण अनन्तवर्मन चोड़ गंग ने करवाया।
भीतरगाँव मन्दिर-
ऽ इस मन्दिर का निर्माण उत्तर प्रदेश के कानपुर में किया गया है जो उत्तर भारत मे ईंटों द्वारा निर्मित पहला मन्दिर है।
ऽ इस मन्दिर में मेहराब के उत्तम नमूने, पौराणिक दृश्यों का अंकन, गर्भगृह के प्रवेश द्वार का अंकन कुशलतापूर्वक किया गया है।