पंचायतीराज

भारतीय संविधान में राज्य के नीत निदेशक तत्वों के तहत अनुच्छेद 40 में राज्यों को  पंचायतों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

श्री बलवन्त रॉय मेहता समिति की सिफारिशों के आधार पर विकेंद्रीकरण के सिद्धांत के अनुरूप उत्तर प्रदेश छेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 ई. में क्रियान्वित किया गया।

उपर्युक्त अधिनियम के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था प्रारम्भ हुई।

73 वें संविधान संसोधन , 1992 के द्वारा भारतीय संविधान में भाग 9 में अनु. 243 - A से 243 - O तक पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है।

पंचायतों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने एवं स्वशासन की इकाई के रूप में सछम बनाने के लिए संबिधान की 11 वीं अनुसूची के कार्यो को पंचायतो को हस्तांतरित किया गया है।

उत्तर प्रदेश में अधिसूचना दिनांक 23 अप्रैल , 1994 के द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई है।

पंचायतों का चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा वर्ष 1995 से किया जा रहा है।

अंतिम पंचायत चुनाव वर्ष 2015 में सम्पन्न हुए थे ।

उत्तर प्रदेश में पंचायतों की त्रिस्तरीय 1. जिला पंचायत , 2. छेत्र पंचायत एवं 3.ग्राम पंचायत व्यवस्था लागू है।

ग्राम पंचायत का अध्यक्ष सरपंच या ग्राम प्रधान होता है।

Posted on by