आर्थिक नियोजन

आर्थिक नियोजन से अभिप्राय है। राज्य के अब अभिकरणों द्वारा देश की आर्थिक संपदा और सेवाओं की एक निश्चित अवधि हेतु आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना।।

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि पूर्ण परिभाषित आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का इष्टतम दोहन करने की प्रक्रिया ही आर्थिक नियोजन है

अर्थशास्त्री गुन्नार मिर्डल के अनुसार आर्थिक नियोजन सरकार की रीति -  नीति संबंधित व कार्यक्रम है। जिसमेंं बाजार शक्ति के क्रियाकलापों में राज्य हस्तक्षेप की प्रणाली की सामाजिक प्रक्रिया  को ऊपर ले जाने हेतु लागू किया जाता है ।

वर्ष 1930 की मंदी के पश्चात आर्थिक नियोजन की अवधारणा लोकप्रिय हुई। महामंदी ने पूंजीवाद की कमियों को उजागर कर दिया ।क्योंकि पूंजीवाद की मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था ने व्यापक सत्ता पर बेरोजगारी ,गरीबी, आय की असमानता और इसके सामाजिक साध्य के प्रति घोर उपेक्षा की स्थिति को जन्म दिया। इन सभी कारणों ने अर्थशास्त्रियों को इसका विकल्प खोजने के लिए बाध्य किया।

सोवियत संघ ने पहली बार राष्ट्रीय नियोजन का विचार रखा और इसे अपनाया लंबी चर्चा के बाद सोवियत नियोजन नियोजन वर्ष 1928 में 5 वर्षों के लिए आरंभ किया।

इसका उद्देश्य- संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करना ।

बेरोजगारी को दूर करना।

निर्धनता चक्र को समाप्त करना।

आधारभूत संरचना के समुचित विचार विकास करना ।

निवेश एवं पूजी निर्माण को बढ़ावा देना।

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