लॉर्ड माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को भारत की परिस्थितियों का मूल्यांकन कर जिस योजना को प्रस्तुत किया उसे 'माउंटबेटन योजना' या 'मन बाटन योजना' या '3 जून योजना' कहकर पुकारा गया ।
इसके मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार थे -
- भारत का विभाजन अनिवार्य है ।
- बंगाल और पंजाब की विधायिका में मुस्लिम बहुल जिलों के प्रतिनिधि और वे जो शेष प्रांत का प्रतिनिधित्व करते हैं अलग-अलग बैठक करेंगे और बहुमत से निर्णय करेंगे कि उनका प्रांत विभाजित हो या ना हो।
- एक भाग बंटवारे का निश्चय करता है तो इसे मान लिया जाएगा।
- बंटवारे के बाद प्रांत यह निर्णय करेंगे कि संविधान सभा में सम्मिलित हुआ जाए या नई सभा बनाई जाए।
- सिंध की विधायिका संपूर्ण रूप से एक विशेष बैठक में यह निश्चय करेगी कि दिल्ली के संविधान सभा में सम्मिलित हुआ जाए या नई संविधान सभा में जाने वालों का साथ दिया जाए ।
- असम के एक मुस्लिम बाहुल्य जिले सिलहट में जनमत संग्रह कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि यदि बंगाल का विभाजन कराया जाए तो बंगाल में सम्मिलित होंगे या असम में बने रहेंगे।
- उत्तरी पश्चिमी सीमा प्रांत के मसले पर भी जनमत संग्रह कराया जाए कि वह दिल्ली के साथ रहेंगे या पाकिस्तान के साथ ।
- ब्रिटिश ब्लूचिस्तान को ऐसा ही उचित अवसर प्रदान करने की बात विचाराधीन थी।
- भारत के प्रमुख दलों के द्वारा भारत की राजनीतिक समस्या के समाधान के लिए बातचीत किया जाएगा।
इसी योजना के अनुसार 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश पार्लियामेंट में भारत स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया। जिसके अंतर्गत 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
14 अगस्त की रात 12:00 बजे जवाहरलाल नेहरू ने नियति से मिलन नामक अपनके एक इतिहास प्रसिद्ध भाषण में कहा रात को जैसे ही 12 घंटा बजेगा, जब पूरा विश्व सो रहा होगा। तो भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा होगा।
भारत की आजादी के समय कांग्रेस के अध्यक्ष आचार्य जे बी कृपलानी भारत के वायसराय माउंटबेटन ब्रिटेन का प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली तथा वहां का सम्राट जॉर्ज षष्ठ थे।