दादावाद व अतियथार्थवाद (स्वीट्जरलैण्ड)
दादावाद का जन्म 1916 ई0 में ज्यूरिक के कबारे बोल्टेर में हुआ।
दादावाद का नामकरण अनोखे ढंग से किया गया था, जर्मन फ्रेंच शब्द कोश को चाकू से खोला गया जो शब्द पहले दिखायी दिया था दादा (झूलने वाला लकड़ी का घोड़ा) बस उसी के नाम से अपने आन्दोलन का प्रसिद्धिकरण किया।
चित्रकार पिकाबिया के दादा में शामिल होने से दादा चित्रण की एक निजी शैली विकसित होने लगी।
पिकाबिया ने दादा कलाकारों को मार्शेल धुशां की चित्रण सम्बन्धी कल्पनाओं से परिचित कराया।
मार्शेल धुशां का पिकाबिया
पिकाबिया व धुशां का 1910 ई0 में पेरिस में परिचय हुआ।
1912 ई0 मंे धुशां ने भविष्यवादियों के गतित्व के सिद्धान्त से प्रभावित होकर अपना प्रसिद्ध चित्र जीने से उतरती नग्नाकृति बनाया।
1. जीने से उतरती नग्नाकृति
2. ब्रह्मचारियों से विवस्त्र की गयी वधू
3. घूमती हुयी काँच की तश्तरियाँ
4. घूमते शिल्प
5. कमरे की चाभी
6. वधू
दादावाद का जर्मनी में प्रसार हुआ, किन्तु जर्मनी दादावाद का मुख्य लक्ष्य मुख्य रूप से राजनैतिक उपहास था।
दादावाद का श्रेष्ठ कलाकार धुशां था।
सेजान को बन्दर के रूप मंे धुशां ने चित्रित किया।(पिकाविया)
धुशां ने मोनालिसा की प्रतिकृति के होठों पर मूँछे चित्रित करके प्रदर्शित किया। जिसका नाम ल्हूक रखा।