अयोध्या पार्ट 2 मेरी नजर से

महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भी ऐसी सांप्रदायिक और जातीय ज्वाला नहीं भड़की थी ।जैसी उस 6 दिसंबर में भड़काई देश ने एक बार फिर विनाश की विभीषिका देखी। 26 वर्ष बहुत होते हैं लेकिन इन वर्षों के बाद भी घाव भरे हैं पीड़ा यथावत है ।

एक पीढ़ी गुजर गई नई पीढ़ी ने संप्रदायिक विभीषिका को पड़ा है सुना है पर सहा नहीं है शायद इसी कारण पीड़ा है कि यह किससे और चित्र में मरोड़ मनोरंजन देते हैं। चुभन नहीं देते ।श्री राम जन्म भूम में उमड़ा जनसैलाब तरह-तरह के नारे लगा रहा था। तब ऐसा प्रतीत हो रहा था कि राष्ट्र की अस्मिता और सौहार्द खतरे में है बाबरी मस्जिद के मलबे में अब यह नारे जमीन शोध हो चुके हैं अब यह ज्वालामुखी कभी न छूटे तो अच्छा ही रहेगा।

हम यह नहीं कह सकते कि संघ भाजपा भी ही पिया अन्य हिंदू संगठनों ने अच्छा किया या बुरा पर यह तय है कि देश को इसका परिणाम भुगतना पड़ा ।और यह भी उस मर्यादित चरित्र के नाम पर जो भी  और क्षमता समर सत्ता के सिद्धांत का पुरुषोत्तम था ।राम के भक्तों ने रामलला का सर्वाधिक अहित किया फटे टेंट में पता नहीं कैसे उनकी मर्यादा की रक्षा हो रही है।

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