दैनिक समसामयिकी

NATIONAL

1.वाइब्रेंट गुजरात में मोदी ने विदेशी निवेशकों को दिलाया सुरक्षित निवेश का विश्वास
• प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत समूचे विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्व्था है और भारत में सुरक्षित निवेश का यही सही अवसर है। उन्होंने डिजिटल इंडिया, स्मार्ट इंडिया, स्किल इंडिया तथा भारत के लोगों के आदशरे का जिक्र करते हुए निवेशकों को उनके सुरक्षित निवेश का आश्वासन दिया। 
• कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष व उद्योगपति थे मौजूद : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित नियंतण्र शिखर सम्मेलन वाइब्रेंट गुजरात 2019 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। लगभग डेढ़ दर्जन देशों की भागीदारी के साथ गुजरात सरकार द्वारा आयोजित वाइब्रेंट गुजरात 2019 में देश के तमाम बड़े उद्योगपतियों के अलावा कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष तथा मंत्रियों सहित विश्व की अनेक बड़ी कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। 
• प्रधानमंत्री ने अपने पूरे संबोधन में निवेशकों को भारत में निवेश के फायदे गिनवाए तथा भारत में निवेशकों के लिए उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारत आज नियंतण्र व्यवसाय के लिए पूरी तरह तैयार है, जो पहले कभी नहीं था।
• व्यवसाय को आसान बनाया : उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के पूरे कार्यकाल के दौरान औसत जीडीपी वृद्धि दर 7.3 फीसदी रही, जो वर्ष 1991 के बाद की किसी भी सरकार से जयादा है, जबकि मुद्रास्फीति की 4.6 फीसदी की औसत दर 1991 के बाद की किसी भी सरकार से कम है। 
• भारत में व्यवसाय को आसान बनाने, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया व मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल क्रांति से व्यवसाय करना आसान हुआ है और भारत ने पिछले 4 सालों में विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट की ग्लोबल रैंकिंग में 77वां स्थान प्राप्त किया है, लेकिन फिर भी हम अभी संतुष्ट नहीं हैं। 
• उन्होंने कहा कि मैंने अपनी टीम को अभी इस दिशा में और अधिक मेहनत करने को कहा है, ताकि हम विश्व के टॉप 50 देशों में शामिल हो सकें।गवन्रेस को बढ़ाया : उन्होंने कहा कि हमने सरकार के हस्तक्षेप को कम किया है और गवन्रेस को बढ़ाया है। भारत इस समय सबसे ज्यादा खुले देशों में एक है। यहां विदेशी निवेश की 90 प्रतिशत मंजूरियां ऑटोमेटिक रूट से आती हैं। 
• उन्होंने कहा कि हमने पिछले चार वर्षो में 263 बिलियन डॉलर एफडीआई हासिल किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत विदेशी निवेश का नंबर वन गंतव्य है। यहां के लोगों की खरीद क्षमता बढ़ रही है, यहां पेशेवर व ऊर्जावान लोगों की फोैज है, घरेलू बाजार बढ़ रहा है, छोटे व मध्यम उद्योग बढ़ रहे हैं।

INTERNATIONAL/BILATERAL

2. यूरेनियम आयात के लिए उज्बेकिस्तान से करार
• भारत ने उज्बेकिस्तान से यूरेनियम के आयात के लिए शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के साथ एक करार किया। करार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2019 के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद किया गया। 
• उज्बेकिस्तान में आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भारत से वित्तपोषण के लिए 20 करोड़ डॉलर कर्ज के एक समझौते पर भी दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों नेता भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए लंबी अवधि तक यूरेनियम अयस्क की आपूत्तर्ि के लिए भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग और उज्बेकिस्तान गणराज्य की नोवोई मिनरल्स एंड मेटलर्जिकल कंपनी के बीच हुए करार के साक्षी बने।’
•  विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 2018 में मिर्जियोयेव के भारत दौरे के दौरान लिए गए विभिन्न फैसलों की दिशा में हुई प्रगति और कार्यान्वयन पर मोदी ने संतोष जताया।

3. मिसाइल रक्षा सहयोग पर अमेरिका-भारत में चर्चा
• पेंटागन ने बताया कि ट्रम्प प्रशासन ने द्विपक्षीय सामरिक साझीदारी को और मजबूत करने के प्रयासों के तहत भारत के साथ संभावित मिसाइल रक्षा सहयोग पर र्चचा की है। 
• उसने बताया कि नई दिल्ली, अमेरिका की ¨हद-प्रशांत रणनीति में अहम तत्व है। भारत ने रूस से एस-400 वायु रक्षा पण्राली खरीदने के लिए पांच अरब डॉलर का ऑर्डर दिया है जिसे लेकर अमेरिका ने सार्वजनिक तौर पर नाखुशी जताई है। इसके मद्देनजर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जारी 81 पृष्ठीय ‘‘मिसाइल रक्षा समीक्षा’ रिपोर्ट में पेंटागन की यह घोषणा काफी मायने रखती है। 
• पेंटागन ने कहा कि आक्रामक मिसाइल क्षमताओं से पैदा होने वाले खतरे अब दुनिया के कुछ ही हिस्सों तक सीमित नहीं रहे हैं। दक्षिण एशिया में अब कई देश हैं जो बैलिस्टिक एवं क्रूज मिसाइल क्षमताओं की उन्नत एवं विविध रेंज विकसित कर रहे हैं। पेंटागन की रिपोर्ट में बृहस्पतिवार

को कहा गया, इस संदर्भ में अमेरिका ने भारत के साथ संभावित मिसाइल रक्षा सहयोग पर र्चचा की है। भारत एक बड़ा रक्षा साझीदार और हमारी भारत-प्रशांत रणनीति का अहम तत्व बन कर उभर रहा है। 
• रिपोर्ट में रूस और चीन की मिसाइल विकास परियोजनाओं को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट में भारत के साथ अमेरिका के संभावित मिसाइल रक्षा सहयोग के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी गई। अमेरिका भारत को अपनी मिसाइल रक्षा पण्राली की पेशकश में पहले अनिच्छा दिखा चुका है।
•  भारत ने कई साल पहले अमेरिका से संपर्क किया था और उसकी मिसाइल रक्षा पण्राली खासकर टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस पण्राली (थाड) हासिल करने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की थी। पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन भारत के साथ अपनी उन्नत मिसाइल रक्षा पण्राली साझा करने का इच्छुक नहीं था जिसके बाद नयी दिल्ली ने रूस से इसे खरीदा था।
• ट्रम्प प्रशासन का उसकी भारत-प्रशांत रणनीति के तहत भारत को अपनी मिसाइल रक्षा पण्राली बेचने की ओर अधिक झुकाव प्रतीत होता है। इस संबंध में दोनों देशों में वार्ता पहले ही शुरू हो चुकी है। 
• अमेरिका की 2017 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया है, ‘‘‘‘हम भारत के साथ हमारी सामरिक साझीदारी को गहरा करेंगे और हम ¨हद महासागर की सुरक्षा और व्यापक क्षेत्र में नेतृत्व की इसकी भूमिका का स्वागत करते हैं।’’

ECONOMY

4. विनिवेश लक्ष्य हासिल हो पाना मुश्किल
• सरकार चालू वित्त वर्ष में 80,000 रूपये  करोड़ रपए के विनिवेश लक्ष्य को पाने से चूक सकती है। एक नई रपट में यह आशंका व्यक्त की गई है। उसके मुताबिक सरकार को लक्ष्य से 20,000 करोड़ रूपये कम विनिवेश प्राप्त होंगे। 
• घरेलू रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने शुक्रवार को कहा कि विनिवेश से होने वाली कमाई में कमी और जीएसटी संग्रह कम रहने से राजकोषीय घाटा के 3.5 फीसद के आसपास रहने की आशंका है। 
• उल्लेखनीय है कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 3.3 फीसद के राजकोषीय घाटा का लक्ष्य रखा था। रपट में कहा गया है, ‘‘वित्तीय बाजारों की स्थिति नाजुक होने के चलते इस वित्त वर्ष में 80,000 करोड़ रपए के विनिवेश लक्ष्य को पूरा कर पाना चुनौतीपूर्ण है। हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश से 60,000 करोड़ रूपये की आय होगी।
• उसमें कहा गया है कि पिछले चार साल में 2017-18 को छोड़ दिया जाए तो किसी भी वित्त वर्ष में विनिवेश लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका है।

SCIENCE

5. नौसेना के लिए तीन नए एयर स्क्वाड्रन मंजूर
• सरकार ने समुद्री सुरक्षा को चाक चौबंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुजरात और तमिलनाडु में नौसेना के तीन नए एयर स्क्वाड्रन बनाने और केरल तथा अंडमान द्वीप में मौजूदा डोर्नियर निगरानी स्क्वाड्रनों के लिए अतिरिक्त भर्ती की मंजूरी दी है।
•  नौसेना के अनुसार, ये तीन नए एयर स्क्वाड्रन गुजरात और तमिलनाडु में बनाए जाएंगे, जिससे समुद्री क्षेत्र में निगरानी पण्राली को पुख्ता करने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकार ने केरल तथा अंडमान द्वीप में डोर्नियर विमानों के स्क्वाड्रनों के लिए अतिरिक्त भर्ती करने का भी निर्णय लिया है। 
• नौसेना के लिए 12 डोर्नियर टोही विमानों की खरीद के संबंध में 29 दिसम्बर 2016 में हिन्दुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड (कानपुर) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन विमानों की आपूत्तर्ि इसी माह शुरू हो जाएगी। ये विमान अत्याधुनिक सेंसरों और उपकरणों से लैस हैं। इनमें ग्लास कॉकपिट, उन्नत निगरानी राडार, ऑप्टिकल सेंसर और नेटवर्क फीचर शामिल हैं। 
• इन विमानों की मदद से समुद्री सीमाओं पर 24 घंटे सेंसर के जरिए नजर रखी जा सकेगी, जिससे नौसेना की निगरानी और टोही क्षमता बढ़ेगी। यह समुद्र के रास्ते आतंक और तस्करी की घटनाओं पर भी अंकुश लगाने में भी सहायक होगी।

6. गगनयान से पहले इसरो दो रोबोट अंतरिक्ष भेजेगा 
• इसरो गगनयान के अंतिम मिशन से पहले दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में अंतरिक्ष में मानव जैसे रोबोट भेजेगा। इन्हें ह्यूमेनॉइड कहा जाता है। अन्य देश ऐसे मिशन से पहले अंतरिक्ष में पशुओं को भेज चुके हैं। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने शुक्रवार को बताया कि दोनों ह्यूमेनॉइड शरीर के तापमान और धड़कन संबंधी टेस्ट करेंगे। 
• इसरो गगनयान मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन करेगा। इनके चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया इसी साल शुरू होगी। प्रशिक्षण विभिन्न चरणों में होगा। पहले चरण के लिए 10 से 15 अंतरिक्ष यात्रियों का चयन होगा। प्रशिक्षण के हर चरण में पास होने वाले तीन लोग अंतरिक्ष जाएंगे। 
• अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण के लिए दूसरे देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की भी मदद ली जाएगी। भारत के पास इस क्षेत्र में अनुभव नहीं है। अंतरिक्ष यान जीएसएलवी मैक-3 को मानव मिशन के अनुरूप बनाने का काम भी इसी साल शुरू होगा। अभी जीएसएलवी पे-लोड ह

ी ले जाता है। 
• ऑर्बिटल मॉड्यूल का टेस्ट भी इस साल शुरू होगा। इसे क्रू-मॉडयूल और सर्विस मॉड्यूल को मिलाकर बनाया जाएगा। क्रू-मॉड्यूल में अंतरिक्ष यात्री रहेंगे। सर्विस मॉड्यूल में उनके जरूरत के सामान और उपकरण होंगे। 
• ऑर्बिटल मॉड्यूल सात दिन तक अंतरिक्ष में पृथ्वी का चक्कर लगाएगा। इस मिशन पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह दुनिया का सबसे सस्ता मानव-अंतरिक्ष मिशन होगा।

7. नई स्टेम सेल तकनीक कैंसर से लड़ने में मददगार हो सकती है
• वैज्ञानिकों ने प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं को परिपक्व टी कोशिकाओं में बदलने में सक्षम एक नई तकनीक विकसित की है जो ट्यूमर को खत्म करने में कारगर हो सकती है। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिलिस के शोधकर्ताओं ने यह तकनीक विकसित की है। 
• यह शोध पत्रिका सेल स्टेम सेल में प्रकाशित हुआ है।टी कोशिकाएं प्रतिरक्षा तंत्र की कोशिकाएं होती है जो संक्रमणों से लड़ती हैं। साथ ही उनमें कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने की क्षमता होती है। 
• शोध के अनुसार, इस तकनीक की मदद से खुद से बनने वाली प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं से टी कोशिकाओं में बदलने की क्षमता कैंसर के इलाज में कारगर हो सकती हैं। 
• शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन एचआईवी और स्व प्रतिरक्षित बीमारियों जैसे वायरल संक्रमण के लिए टी सेल थेरेपी पर और शोध के लिए प्रेरित कर सकता है।

8. शनि ग्रह से युवा हैं उसके वलय
• हमारे सौर मंडल का छठा ग्रह शनि भी अन्य ग्रहों की तरह ही करीब 4.5 अरब साल पहले विकसित हो गया था, लेकिन उसके वलय काफी युवा हैं और उनका निर्माण एक से 10 करोड़ साल पहले ही हुआ था। 
• लंबे समय से वैज्ञानिकों का अनुमान था कि शनि के वलय उसके जितने पुराने नहीं हैं। उनका निर्माण या तो शनि के किसी चंद्रमा या फिर ग्रह के नजदीक किसी धूमकेतु के टकराने से हुआ है। 
• कैसिनी अंतरिक्ष यान से जुटाए गए आंकड़ों के अध्ययन के बाद उनका दावा सही साबित हो गया है। सेपिंजा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम के वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि लंबे समय तक अपने वलयों के बिना ही सूर्य की परिक्रमा कर रहा था। 
• बता दें कि कैसिनी को शनि, उसके वलय और चंद्रमाओं के अध्ययन के लिए अमेरिका और यूरोप के साझा मिशन पर लांच किया गया था। यह शनि की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला यान था। 
• 2017 में मिशन खत्म होने से पहले कैसिनी ने शनि और उसके वलयों के बीच कई चक्कर लगाए थे। ग्रह के नजदीक जाने पर कैसिनी के झुकाव का अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने वलयों के द्रव्यमान और उम्र का पता लगाया है। ये वलय 99 फीसद बर्फ से बने हैं।  
• शोधकर्ता लुसियानो आइस ने कहा, ‘शनि के वलयों की उम्र और द्रव्यमान का पता लगाना कैसिनी के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल था। वलयों का वजन कम है, जिससे साबित होता है कि ये युवा हैं। उम्र बढ़ने के साथ ये वलय अन्य पदार्थो और छोटे-छोटे कणों को आकर्षित कर भारी होते जाएंगे।’

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