भारत में ऊर्जा संकट-

भारत की जनसंख्या विश्व की 17% है आज देश का गया |hydro- कार्बन आरक्षित भंडार वैश्विक आरक्षित भंडार का महल दशमलव 6% है वहीं भारत का खपत स्तर वैश्विक  औसत का एक चौथाई है जबकि दूसरी ओर देश की घरेलू क्षमताओं का पूर्णतया उपयोग नहीं किया जा रहा है उदाहरण के तौर पर देश की तलहटी घाटियों का 80% भाग्य तो कम अन्वेषित है या इसका एकदम अन्वेषण नहीं हुआ-

1- देश का ध्यान कोयला से  से तेल पर फिर तेल से नाभिकीय ऊर्जा पर था और अब गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर है इस प्रकार अलग-अलग क्षेत्रों में किया गया विकास कभी भी संगत एवं व्यापक नहीं रहा|

2- फिक्की के अनुसार एक अध्ययन के मुताबिक भारत की खनन कुशलता अमेरिका की खनन कुशलता के केवल 1/10% है इसका मुख्य कारण है कि 55000 करोड रुपए आरक्षित नगद समृद्धि के बावजूद कोल इंडिया लिमिटेड क्षेत्र में विशेषज्ञों को लाने या प्रतियोगी की सुधार पर निवेश नहीं कर रही है भारत में बिजली के हालात संकट के दौर से गुजर रही है|

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार देश में मांग के सापेक्ष 11000 मेगा वाट से भी ज्यादा बिजली कम पड़ रही है 2 दर्जन से ऊपर तापी बिजली घरों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है दूसरी ओर देश के कई राज्यों में किसानों को इतनी कम बिजली मिलती है कि उन्होंने कनेक्शन कटवाना बेहतर समझा वहीं खेती के लिए डीजल पंप सेट ट्रैक्टर से चलने वाले पंप और हार्वेस्टर मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है नदियों की सफाई के लिए अरबों रुपए की लागत से बने सैकड़ों सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बंद करने पड़े हैं इस प्रकार ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है|

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