दीनदयाल अंत्योदय योजना UPSC/UPPCS

दीनदयाल अंत्योदय योजना का उद्देश्य योजना का उद्देश्य कौशल विकास और अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर शहरी और ग्रामीण गरीबी को कम करना है। मेक इन इंडिया, कार्यक्रम के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सामाजिक तथा आर्थिक बेहतरी के लिए कौशल विकास आवश्यक है। दीनदयाल अंत्योदय योजना को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय (H.U.P.A) के  तहत शुरू किया गया था। भारत सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

यह योजना  राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन (एन.यू.एल.एम.) और  राष्ट्रीय ग्रामीण अजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) का एकीकरण है।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एन.यू.एल.एम.) को दीन दयाल अंत्योदय योजना - (डी.ए.वाई.-एन.यू.एल.एम.) और हिन्दी में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन नाम दिया गया है। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों के लिए दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना के अंतर्गत सभी 4041 शहरों और कस्बों को कवर कर पूरे शहरी आबादी को लगभग कवर किया जाएगा। वर्तमान में, सभी शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में केवल 790 कस्बों और शहरों को कवर किया गया है।

डीएवाई-एनयूएलएम के घटक

इस योजना में दो घटक हैं, एक ग्रामीण भारत के लिए तथा दूसरी शहरी भारत के लिए

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना के रूप में नामित शहरी घटक को   आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय  द्वारा लागू किया जाएगा।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के रूप में नामित ग्रामीण घटक को ग्रामीण विकास     मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।

 

योजना का मुख्य विशेषताएँ

  • कौशल प्रशिक्षण और स्थापन के माध्यम से रोजगार - मिशन के तहत शहरी गरीबों को प्रशिक्षित कर कुशल बनाने के लिए 15 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रति व्यक्ति 18 हजार रुपये है। इसके अलावा, शहर आजीविका केंद्रों के जरिए शहरी नागरिकों द्वारा शहरी गरीबों को बाजारोन्मुख कौशल में प्रशिक्षित करने की बड़ी मांग को पूरा किया जाएगा।
  • सामजिक एकजुटता और संस्था विकास - इसे सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के गठन के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह को 10,000 रुपये का प्रारंभिक समर्थन दिया जाता है। पंजीकृत क्षेत्रों के स्तर महासंघों को 50, 000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
  • शहरी गरीबों को सब्सिडी - सूक्ष्म उद्यमों (माइक्रो– इंटरप्राइजेज) और समूह उद्यमों (ग्रुप इंटरप्राइजेज) की स्थापना के जरिए स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए 2 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी औऱ समूह उद्यमों पर 10 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • शहरी निराश्रय के लिए आश्रय - शहरी बेघरों के लिए आश्रयों के निर्माण की लागत योजना के तहत पूरी तरह से वित्त पोषित है।

अन्य साधन - बुनियादी ढांचे की स्थापना के माध्यम से विक्रेताओं के लिए विक्रेता बाजार का विकास और कौशल को बढ़ावा और कूड़ा उठाने वालों और विकलांगजनों आदि के लिए विशेष परियोजनाएं।

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