'जर्मनवाच' एवं क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क ने संयुक्त रूप से 'जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक' ( climate change performance index - CCPI) 10 दिसंबर 2018 को जारी सूचकांक पहली बार वर्ष 2005 में जारी किया गया था मानवीय कृत्य मानदंडों के आधार पर यह सूचकांक 56 देशों के जलवायु संरक्षण प्रदर्शन मूल्यांकन एवं तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य जलवायु संरक्षण पर महत्वाकांक्षी कार्य करने में असफल देशों पर सामाजिक एवं राजनीतिक दबाव डालना एवं जलवायु नीतियों पर सबसे अच्छा काम करने वाले देशों को चिन्हित करना है। वर्ष 2019 केे जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में 76.28 अंकों के साथ स्वीडन मैं शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। शीर्ष तीन स्थान रिक्त रखे जाने के कारण स्वीडन सूचकांक मे चतुर्थ क्रम पर है। प्रथम तीन स्थान पर कोई भी देश स्थान नहीं बना सका है, क्योंकि पेरिस समझौतेे के लागू होने के बाद भी किसी देश द्वारा जलवायुु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों की रोकथाम हेतु पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं सूचकांक में मोरक्को पाचवा एवं लिथुआनिया को छठा स्थान प्राप्त्त हुआ है। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2019 में भारत को 11वां स्थान प्राप्त हुआ है। इस वर्ष के सूचकांक में भारत की स्थिति में गत वर्ष की तुलना में तीन स्थानों का सुधार हुआ है। वर्ष 2018 के सूचकांक में भारत का 14वां स्थान था। विश्व के 2 सबसे बड़े काबॅन उत्सर्जक देशों चीन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका सूचकांक में क्रमशः 33 वे तथा 59वें स्थान पर है। सूचकांक में सबसे नीचे सऊदी अरब 60 वा संयुक्त राज अमेरिका एवं ईरान 58 वां स्थित है, जिन्हें सबसे खराब रेटिंग प्रदान की गई है।